लोहिया अस्पताल में इलाज के बाद कटा हाथ, न्याय के लिए दर-दर भटक रहा फिरोजाबाद का परिवार

लोहिया अस्पताल में इलाज के बाद दो बार कटा हाथ, न्याय के लिए दर-दर भटक रहा फिरोजाबाद का परिवार; मां का सवाल—‘जब बेटा बेहोश था तो हाथ कैसे हिलाया?’
ऑपरेशन के बाद शुरू हुई परेशानी, देखते ही देखते बदल गई जिंदगी

लखनऊ/फिरोजाबाद। एक मां के लिए अपने इकलौते बेटे को स्वस्थ और सुरक्षित देखना सबसे बड़ी उम्मीद होती है। लेकिन फिरोजाबाद के अंकित राठौर और उनके परिवार के लिए इलाज का एक सिलसिला जिंदगी का ऐसा दर्द बन गया, जिससे वे आज तक उबर नहीं पाए हैं। परिवार का आरोप है कि लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में पेट के ऑपरेशन के बाद ड्रिप लगाने के लिए लगाए गए वीगो के स्थान पर गंभीर समस्या पैदा हुई और इसके बाद अंकित के हाथ में सूजन आ गई।
परिजनों के मुताबिक, अगले दिन स्थिति बिगड़ने पर हाथ की सर्जरी की गई। इसके बाद हाथ में संक्रमण और सड़न फैलने लगी। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि डॉक्टरों को अंकित का हाथ काटना पड़ा। परिवार का कहना है कि इसके बावजूद संक्रमण नियंत्रित नहीं हुआ और बाद में दोबारा सर्जरी कर हाथ का एक और हिस्सा काटना पड़ा।
मां के सामने बेटे की जिंदगी बदल गई
परिवार के लिए सबसे पीड़ादायक बात यह है कि जिस बेटे को वे इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौटने की उम्मीद से अस्पताल ले गए थे, वह आज अपने हाथों से वंचित है। अंकित की मां का कहना है कि उनका बेटा उनका इकलौता सहारा है और इलाज के बाद उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।
मां भावुक होकर सवाल उठाती हैं कि अगर उनका बेटा ऑपरेशन के बाद बेहोशी की हालत में था, तो उसके हाथ को लेकर यह कैसे कहा जा सकता है कि उसने हाथ इधर-उधर किया होगा और इसी वजह से परेशानी हुई।
शिकायतों के बाद भी न्याय की तलाश जारी
परिवार का दावा है कि उन्होंने मामले की शिकायत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री स्तर तक की। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी परेशानी और बेटे की स्थिति के बारे में अधिकारियों के सामने गुहार लगाई, लेकिन अभी तक उन्हें वह न्याय नहीं मिला जिसकी वे उम्मीद कर रहे हैं।
परिजनों के मुताबिक, आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद वे लगातार लखनऊ के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी मांग किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराकर सच्चाई सामने लाना और यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी तय करना है।
परिवार चाहता है निष्पक्ष जांच
अंकित की मां का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने इकलौते बेटे को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया था, लेकिन आज उसका जीवन पहले जैसा नहीं रहा। परिवार आर्थिक और मानसिक दोनों स्तरों पर कठिन दौर से गुजर रहा है।
परिवार ने संबंधित अधिकारियों से मामले की मेडिकल रिकॉर्ड, ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज, उपचार की पूरी प्रक्रिया और संक्रमण के कारणों की विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग की है, ताकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्य सामने आ सकें।
यह मामला चिकित्सा उपचार से जुड़ा गंभीर आरोप होने के कारण अस्पताल अथवा संबंधित चिकित्सकों का पक्ष भी जांच और निष्पक्ष रिपोर्टिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर परिवार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब मिलने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।
अंकित का परिवार आज भी एक ही उम्मीद के सहारे है—पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, सच्चाई सामने आए और यदि किसी की जिम्मेदारी बनती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।

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