योगी सरकार का झूठा और किसान-विरोधी बजट: गन्ना किसानों को सिर्फ दिखावा, असल राहत नहीं –सवित मलिक राष्ट्रीय अध्यक्ष किसान यूनियन

शामली : 11 फरवरी 2026: योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा आज पेश किए गए 9.12 लाख करोड़ रुपये के बजट को किसान
यूनियन ने किसानों के साथ धोखा और चुनावी स्टंट करार दिया है। यह बजट गन्ना किसानों, छोटे-मझोले किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज करता है।
गन्ना किसानों के साथ अन्याय:
महज 30 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी को ऐतिहासिक बताना मजाक है। महंगाई और उत्पादन लागत (खाद, बीज, डीजल, मजदूरी) में कई गुना वृद्धि के बीच यह बढ़ोतरी किसानों की आय को बढ़ाने के बजाय घटा रही है। गन्ना किसान मांग कर रहे हैं कि न्यूनतम 500 रुपये प्रति क्विंटल तक मूल्य बढ़ाया जाए, लेकिन सरकार ने उनकी सुनवाई नहीं की।
सरकार खुद दावा करती है कि पिछले वर्षों में 3 लाख करोड़ से ज्यादा भुगतान किया, लेकिन हकीकत यह है कि कई मिलों में आज भी लंबित बकाया बाकी है और भुगतान में देरी जारी है। यह पारदर्शी भुगतान का झूठा दावा है।
महिला गन्ना किसानों को पर्ची में प्राथमिकता देने का दावा भी खोखला है – जमीनी हकीकत में लाखों महिला किसान अभी भी बिचौलियों और मिल मालिकों के शोषण का शिकार हैं।
अन्य किसानों की अनदेखी:
गेहूं-धान-मोटे अनाज की खरीद के आंकड़े दिखाकर सरकार आत्ममुग्ध हो रही है, लेकिन एमएसपी को कानूनी गारंटी नहीं दी जा रही। प्राकृतिक आपदा, बाढ़, सूखा और कीटनाशक से प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिल रहा।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में क्लेम की राशि कम और प्रक्रिया जटिल है – लाखों किसान अभी भी इंतजार में हैं।
सिंचाई, उन्नत बीज, भंडारण और बाजार तक पहुंच जैसी मूलभूत सुविधाओं पर ठोस निवेश की कमी है। बजट में बड़े-बड़े दावे हैं, लेकिन ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और किसानों के लिए कर्जमाफी जैसी मांगों पर खामोशी।
यह बजट अमीरों, बड़े उद्योगपतियों और अदृश्य दोस्तों के लिए है, न कि अन्नदाताओं के लिए। उत्तर प्रदेश के करोड़ों किसान परिवारों को महंगाई, बेरोजगारी और कर्ज के बोझ तले दबाया जा रहा है।
किसान यूनियन राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक ने कहा सरकार के वादे थे
गन्ना मूल्य को उत्पादन लागत से ज्यादा रखा जाएगा।
सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाएगी।
पुराने बकाया का तत्काल भुगतान और कर्जमाफी होगी।
किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाई जाएगी।
योगी सरकार किसानों की मेहनत का मजाक उड़ा रही है। यह बजट आत्मनिर्भर यूपी” नहीं, बल्कि “किसान-विरोधी यूपी का प्रतीक है। हम अन्नदाताओं के साथ हैं और उनकी लड़ाई लड़ेंगे।
जय जवान जय किसान