मुज़फ्फरनगर: 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते सिविल लाइन थाने के एसएसआई प्रवीण शर्मा गिरफ्तार, एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई से मचा हड़कंप

मुज़फ्फरनगर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन टीम ने बुधवार को सिविल लाइन थाने में तैनात वरिष्ठ उपनिरीक्षक (एसएसआई) प्रवीण शर्मा को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई सीधे सिविल लाइन थाने के परिसर में की गई, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी दरोगा को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए थाना सिखेड़ा ले जाया गया। सूत्रों के अनुसार कार्रवाई के दौरान एंटी करप्शन टीम और आरोपी दरोगा के बीच हाथापाई भी हुई।
घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा और अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) सिद्धार्थ के. मिश्रा सिविल लाइन थाने पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी लेकर संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की।
मामले के शिकायतकर्ता चरथावल थाना क्षेत्र के गांव कसौली निवासी ओमपाल सिंह ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ कोर्ट के आदेश पर दर्ज एक पुराने मुकदमे की विवेचना एसएसआई प्रवीण शर्मा के पास थी। आरोप है कि मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगाने के नाम पर दरोगा एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग कर रहे थे। शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने इस संबंध में सीओ सिटी को भी अवगत कराया था। उनका दावा है कि सीओ द्वारा विवेचना में एफआर लगाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद आरोपी दरोगा रिश्वत की मांग पर अड़े रहे।
इसके बाद ओमपाल सिंह ने एंटी करप्शन टीम से शिकायत की। शिकायत का सत्यापन होने के बाद टीम ने जाल बिछाया। तय योजना के अनुसार बुधवार दोपहर शिकायतकर्ता 50 हजार रुपये लेकर सिविल लाइन थाने पहुंचा। जैसे ही उसने आरोपी दरोगा को रकम सौंपी, पहले से मौजूद एंटी करप्शन टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया।
बताया गया कि संबंधित मुकदमा 3 मार्च 2025 को कोर्ट के आदेश पर ग्राम दुधली के प्रधान मुकेश आर्य की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिसमें ओमपाल सिंह सहित कई लोगों पर आर्य समाज की भूमि पर कब्जा करने और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए थे।
अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) सिद्धार्थ के. मिश्रा ने बताया कि एंटी करप्शन टीम द्वारा आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।