महिलाओं के खिलाफ बयान देकर बुरे फंसे कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य और प्रेमानंद महाराज
हिंदू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि महाराज ने कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य और प्रेमानंद महाराज पर साधा निशाना

देश में कथा वाचक और साधु संतों के द्वारा महिलाओं को लेकर विवादित बयान सामने आ रहे हैं जहां एक और जाने-माने कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य और संत प्रेमानंद महाराज के द्वारा महिलाओं को कटघरे में खड़ा करते हुए अशोक अपनी टिप्पणी की गई जिसमें युवतियों पर चार-चार बॉयफ्रेंड रखने तक का कमेंट कर दिया इस मामले में जहां ऋतंभरा और फिर साध्वी प्राची के द्वारा प्रेमानंद महाराज का समर्थन किया गया इस मामले में अब उसे समय नया मोड़ आ गया जब हिंदू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि महाराज ने कथावाचक और स्वामी प्रेमानंद महाराज पर गंभीर आरोप लगाए हैं जिसमें महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद महाराज ने कहा कि अनिरुद्ध आचार्य और प्रेमानंद महाराज ने महिलाओं को जो टारगेट किया है यह वास्तव में सनातन और पूरी संस्कृति पर हमला है । और उनको यह हमला करने का किसी ने अधिकार नहीं दिया है।

और वो सारी महिलाओं को व्यभाचारी कहे तो यह बहुत गंदा उन्होंने कहा है और उनको समाज से क्षमा मांगनी चाहिए और इसके लिए हरिद्वार में जाकर प्रायश्चित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुझे तो उनकी इस भाषा से इस वाणी से ऐसा लगता है कि इन्होंने 100 महिलाओं को टेस्ट किया हो तभी तो कर फेल की होगी इन्होंने इतना गंदा इनका सोच है इसका मतलब यह चरित्रहीन हैं जो देश की महिलाओं को चरित्रहीन कहते हैं आपके पास कौन सा सर्टिफिकेट था जो आपने महिलाओं को चेक किया क्या ??.. 100 महिलाओं के साथ आपके संबंध रहे क्या ?..

मैं पूछना चाहता हूं कि कौन सा सर्टिफिकेट आपके पास है जो 100 महिलाओं में से अपने चार को छांट दिया यह बहुत गंदा स्टेटमेंट है और प्रेमानंद जी महाराज को यह पीला वस्त्र पहनना छोड़ देना चाहिए और उनमें जरा सी भी नैतिकता है .. क्योंकि प्रेमानंद जी सनातन के वस्त्र पहनकर के कालनेमी का कार्य कर रहे हैं वह कलयुग का कालनेमि है क्योंकि सनातन के कपड़े पहनकर सनातन पर ही हमला कर रहे हैं जो आदमी उससे बड़ा कोई कालनेमि नहीं हो सकता मैं यह भी कहूंगा कि वह वास्तव में कालनेमि तब भी ठीक था कि उसका एक उद्देश्य था रावण को खुश करने का.. लेकिन यह तो उससे भी आगे लग गया.. पता नहीं इसको सनातन संस्कृति पर हमला करके किस किस को खुश करना है। क्योंकि स्वयं तो आप उनका हाल-चाल देखते होंगे स्वयं तो सूट बूट से रहते हैं 25- 25 हजार के जूते पहन कर के सुबह 2:00 बजे कैमरा के बीच शूटिंग करते हैं और यह महात्माओं के लक्षण है?.. महात्माओं के लक्षण है अगर किसी से कोई गलती हो तो उसे पर पर्दा डालता है महात्माओं का इलेक्शन नहीं है के सारे समाज को भ्रष्ट बतावे सारे समाज को दूषित बतावे उसमें संत का एक भी लक्षण नहीं है। उसमें प्राथमिक लक्षण भी नहीं है वह सच्चे रूप में कालनेमि है धोखेबाज है समाज के साथ अत्याचार करने वाला है और जितनी उसकी संज्ञा दी जाए उतनी कम है प्रेमानंद को.. रही बात अनिरुद्ध आचार्य की अनिरुद्ध आचार्य जैसे प्रेमानंद ड्रामेबाज है कालनेमि है और अनिरुद्ध आचार्य तो वास्तव में ताली बजाकर डांस करने वाला है ताली बजाकर डांस करने के अलावा और कुछ नहीं है धर्म का ठेकेदार बनाकर के धर्म का हरण करता है व्यापार करता है लाखों करोड़ों की संपत्ति इकट्ठी करता है और महिलाओं को भ्रमित करके उनकी संपत्ति लेकर के उन्हें महिलाओं को अपमानित करता है वास्तव में उसका भी ऐसा कुकृत है समाज में क्षमा योग्य नहीं है। भारत की एक-एक सनातनी महिला को पड़कर उसे सबक सिखाना चाहिए और उसकी कथा बंद करनी चाहिए ताकि वह सनातन पर दोबारा हमला न कर सके
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स्वामी प्रेमानंद के उस बयान को लेकर जिसमें उन्होंने कहा कि जो गलत आचरण करते हैं वही मेरे बयान का विरोध करेंगे बाकी संत समाज मेरे साथ है के सवाल पर स्वामी प्रबोधानंद ने कहा कि इससे तो साफ लग रहा है जग कैसा की मूसा जग में उसकी बुराई नहीं दिखाई देती। क्योंकि युधिष्ठिर और दुर्योधन का प्रसंग आता है जो समाज में भेजा गया कि बुरा आदमी ढूंढ कर लो एक को कहा कि तुम सच्चा आदमी ढूंढ कर लो तो दुर्योधन को कोई सच्चा आदमी नहीं मिला और युधिष्ठिर को कोई बड़ा आदमी नहीं मिला क्योंकि जैसा खुद का नजरिया होता है वैसा संसार दिखाई देता है प्रेमानंद जी महाराज आपका नजरिया खराब है आपका आचरण खराब है इसलिए आपको समाज पूरा दूषित दिखाई दे रहा है यहां की देवी अवस्था में साक्षात भगवान का स्वरूप है हम उनको भगवान का स्वरूप मानते है । भारत की महिलाओं की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है अगर किसी एक आदमी गलती करने के कारण से 100 और 4 की संज्ञा देना बिल्कुल निहायत गलत है। उन्होंने कहा कि सोफिया कुरैशी ने पूरे पाकिस्तान को धूल चटाई है और प्रेमानंद जी ऐश कर रहे थे ऐश और आराम में डूबे हुए थे यह संत के लक्षण है क्या रोज टीवी पर छाये रहना और रोज टीवी पर रिकॉर्डिंग करना और ऐसी महिलाओं का मनोबल गिरता है और वास्तव में हमारी देश की जो देवियां हैं हमारे भारत की शक्तियां हैं हमारे यहां एक से एक बड़ी देवी पैदा हुई है ऐसी सोफिया तो एक है ऐसी अनेकों है गार्गी है बहुत सारी हुई जिनका शास्त्रार्थ के लिए उनसे कोई ज्ञानी नहीं हुआ उनके कोई चरित्र की व्याख्या नहीं कर सकते