केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ प्री-बजट कंसल्टेशन मीटिंग में भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक एवं पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन की प्रभावी भागीदारी, कहा बजट में कृषि की राशि को दोगुना किया जाय- धर्मेंद्र मलिक

केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ प्री-बजट कंसल्टेशन मीटिंग में भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक एवं पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन की प्रभावी भागीदारी, कहा बजट में कृषि की राशि को दोगुना किया जाय- धर्मेंद्र मलिक

मुज़फ्फरनगर: मंगलवार को कृषि भवन, नई दिल्ली के कक्ष संख्या 142 में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित प्री-बजट कंसल्टेशन मीटिंग में भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक, पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन, चेयरमैन  अशोक बालियान मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) ने सक्रिय रूप से भाग लिया। संगठन की ओर से ने बैठक में उपस्थिति दर्ज कराते हुए किसानों की समस्याओं और कृषि क्षेत्र के सुधारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया।

बैठक के दौरान भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक की ओर से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को मांग पत्र देकर अवगत कराया जिसमें निम्न लिखित मुख्य बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित कराया गया और सुझाव दिए गए कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा बजट से पूर्व हितधारकों से परामर्श में कृषि से सम्बंधित सुझाव भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक बजट से पूर्व किसानों के साथ किए जा रहे परामर्श के लिए आपका आभार व्यक्त करते हुए कहना चाहती है कि देश में आज भी निजी क्षेत्र में सबसे अधिक रोजगार कृषि क्षेत्र से है लेकिन यह क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। कृषि क्षेत्र को बजट से अधिक प्रभावित नीतियां और फैसले करते है। कृषि को लेकर एक समग्र पंचवर्षीय किसान नीति की जरूरत है जिसका उद्देश्य केवल उत्पादन आधारित न होकर कृषि एवं किसान कल्याण पर आधारित हो।कृषि हमेशा एक बड़े विचार का हिस्सा रही है आजादी के बाद यह बड़ा विचार जमींदारी उन्मूलन प्रथा,1950 में सामुदायिक विकास की पहल, 1960-70 के दशक में हरित क्रांति,1980 के दशक में दुग्ध क्रांति आई,लेकिन यह प्रक्रिया 1990 के दशक के बाद बंद हो गई। 2014 के बाद कृषि को लेकर चिंता दिखाई दी है। कृषि में लगातार बजट बढ़ाने के लिए हम भारत सरकार का आभार व्यक्त करते है
भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक द्वारा देशभर के किसानों की समस्याओं पर आज कृषि मंत्रालय में आयोजित बजट से पूर्व चर्चा में निम्नलिखित सुझाव है ।
1. फसलों का उचित एवं निश्चित लाभकारी समर्थन मूल्य- किसानों की आय सुरक्षा और खेती की लाभकारीता सुनिश्चित करने हेतु सरकार से मांग है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार C2 लागत का डेढ़ गुना (C2 + 50%) न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू किया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित और न्यायसंगत मूल्य मिल सके।
2. पंचवर्षीय कृषि नीति-
देश में दीर्घकालिक कृषि नीति की आवश्यकता है। कृषि क्षेत्र में स्थिरता, दीर्घकालिक योजना और किसानों की आय वृद्धि सुनिश्चित करने हेतु सरकार से मांग है कि देश में एक स्पष्ट व बाध्यकारी “पंचवर्षीय कृषि नीति” लागू की जाए, जिसमें उत्पादन, मूल्य, विपणन, निर्यात, सिंचाई एवं तकनीकी विकास के लक्ष्यों को तय कर उन्हें पाँच वर्षों के लिए स्थाई रूप से लागू किया जाए। इससे किसानों को भरोसा, निवेश को दिशा और कृषि क्षेत्र को स्थिर विकास का आधार मिलेगा।US Farm Bill” जैसे दीर्घकालिक 5-वर्षीय कृषि बजट की व्यवस्था की जाय।
हर साल नीति बदलने की बजाय 5 साल का निश्चित कृषि पैकेज दिया जाय
3.सस्ता एवं लंबी अवधि का कृषि ऋण-
कृषि निवेश बढ़ाने और किसानों पर वित्तीय दबाव कम करने हेतु सरकार से मांग है कि किसानों को सस्ता तथा लंबी अवधि का कृषि ऋण उपलब्ध कराया जाए, जिसमें ब्याज दर न्यूनतम हो, पुनर्भुगतान अवधि लंबी हो तथा प्राकृतिक आपदा या फसल नुकसान की स्थिति में ऋण पुनर्गठन व ब्याज माफी की स्पष्ट व्यवस्था हो।
फार्म लोन सिक्यूरिटी कॉरपोरेशन—किसानों का ऋण डिफॉल्ट सरकारी जोखिम पूल में जाए।
4- कृषि वैल्यू चैन को मजबूत बनाने हेतु प्रावधान
किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक अधिक लाभ दिलाने और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए सरकार से मांग है कि कृषि वैल्यू चेन को मजबूत बनाने हेतु बजट में विशेष प्रावधान किए जाएँ। इसके अंतर्गत खेत स्तर पर ग्रेडिंग–सॉर्टिंग यूनिट, भंडारण-कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग यूनिट, फार्मगेट मार्केट, कृषि लॉजिस्टिक्स तथा FPO को वित्तीय सहायता और अनुदान दिया जाए, ताकि किसानों की उपज को बेहतर मूल्य मिल सके और कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत हो।

5.कृषि विस्तार प्रणाली में सुधार एवं बदलाव – देश का किसान वर्तमान में कृषि विभाग की नहीं बल्कि कीटनाशक बेचने वाली कंपनियों के एजेंट की सलाह पर खेती कर रहे है किसानों तक समय पर वैज्ञानिक सलाह पहुँचाने के लिए सरकार से मांग है कि भारत की कृषि विस्तार प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएँ। इसके तहत कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), कृषि विभाग के फील्ड स्टाफ, डिजिटल सलाह प्रणाली और गांव-स्तरीय कृषि सेवा केंद्रों को मजबूत किया जाए, ताकि किसानों को आधुनिक तकनीक, फसल प्रबंधन, बाजार जानकारी और नई शोध का लाभ सीधे खेत तक मिल सके।
6. प्रधानमंत्री फसल बीमा- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में छोटे किसानों के लिए बीमा प्रीमियम शून्य होनी चाहिए, ताकि वे बीमा योजना का लाभ लें सके। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसान को इकाई माना जाए।किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बेहतर सुरक्षा देने के लिए सरकार से मांग है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में आवश्यक सुधार किए जाएँ। इसके तहत प्रीमियम को और कम किया जाए, नुकसान का सर्वेक्षण ड्रोन व तकनीक से समयबद्ध तरीके से कराया जाए, और क्लेम भुगतान की प्रक्रिया सरल व तेज की जाए ताकि किसानों को उनकी क्षतिपूर्ति समय पर प्राप्त हो सके।
अमेरिका की तरह Revenue Protection Crop Insurance—सिर्फ फसल नुकसान नहीं, बाजार मूल्य नुकसान भी कवर किया जाय।किसानों को बीमा कंपनियों के चयन का विकल्प दिया जाय। शत प्रतिशत किसानों तक कवरेज हेतु बजट में वृद्धि कर कम से कम,20,000 करोड़ दिया जाय
7. सिंचाई और जल प्रबंधन– भारतीय कृषि आज भी बारिश एवं जलवायु पर निर्भर है। बूंद – बूंद से सिंचाई का तरीका बहुत महंगा एवं हर जगह कारगर नहीं है।देश में नहरों पर आधारित बड़ी परियोजनाओं के बनाए जाने एवं जल प्रबंधन की आवश्यकता है। बारिश के समय बाढ़ के कारण किसानों को प्रभावित करने वाला जल बह जाता है। इसके संरक्षण हेतु परियोजनाओं के क्रियान्वयन की जरूरत है
8.कृषि विपणन और इंफ्रास्ट्रक्चर- कृषि क्षेत्र के बाजार के रूप में लगभग 7000 हजार मंडिया है। देशभर में अगर पांच किलोमीटर पर एक मंडी का निर्माण किया जाए तो।देश में लगभग 42,000 मंडियों की जरूरत है।देश के अनेक राज्यों में मंडी नहीं है जहां मंडिया मजबूत नहीं है वहां भी उपज को सुखाने, छटाई,ग्रेडिंग,पैकेजिंग की सुविधा नहीं है।उपज की टेस्टिंग का कोई वैज्ञानिक आधार भी नहीं है। देश में मंडी को आधुनिक सुविधायुक्त बनाया जाय ।खाद्य पदार्थों के नुकसान को कम करने हेतु कोल्ड चैन,भण्डारण की क्षमता को मजबूत किया जाय जिससे किसान को संरक्षित किया जा सके।
9. ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योग की स्थापना– ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के लिए कृषि आधारित उद्योग व लघु उद्योग की स्थापना ग्रामीण क्षेत्रों की जाय।इन उत्पादों को उनकी बिक्री सहित संरक्षण दिया जाये।
10. सामाजिक सुरक्षा– किसानों को सामाजिक सुरक्षा जैसे पेंशन, स्वास्थ बीमा, दुर्घटना बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं में शामिल किया जाय।
11. निर्यातक फसलों के लिए बोर्ड का गठन – देश में मुख्य निर्यातक फसलों के निर्यात के लिए भारतीय तंबाकू बोर्ड व कॉफ़ी बोर्ड की तरह अन्य फसलों के बोर्ड बनाने की आवश्यकता है, क्योकि मुख्य निर्यातक फसलों के निर्यात के किये बोर्ड निर्यातक फसलों के क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास,वित्त व निर्यात सहित विपणन आदि के लिए कार्य करेगा।
12. कृषि उपकरणों एवं खेती में प्रयुक्त होने वाले समान पर जीएसटी समाप्त करना – कृषि उपकरणों,खाद, कीटनाशक दवाई, खरपतवार नाशक, मुर्गी दाना , पशु आहार आदि को जीएसटी से बाहर किया जाय।जब राज्यों में बिक्री कर की व्यवस्था थी, उस समय भी किसान इस तरह के टेक्स से बाहर था।
13. जलवायु परिवर्तन- जलवायु परिवर्तन कृषि के अस्तित्व के लिए खतरा है। हीट बेव, तेज बारिश, असमय बारिश, बादल फटना आदि घटनाएं हो रही है। इसके लिए कीटों से निपटने,बीज आदि के लिए योजना बनाई जाए।सूखा–बाढ़ सहनशील बीज की खोज,जलवायु अनुकूल फसल विविधीकरण,लचीली कृषि अवसंरचना निर्माण, खेत-तालाब, चेक डैम, ड्रिप-स्प्रिंकलर पर 80% तक सब्सिडी आदि का प्रावधान किया जाय ।क्लाइमेट-रेसिलिएंट खेती हेतु विशेष कोष (₹20,000 करोड़) बनाया जाय
14. प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान – इस अभियान में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष बजट में दोगुनी राशि का प्रावधान किया
15. कृषि निर्यात एवं मुक्त व्यापार समझौते – न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम मूल्य पर किसी भी दशा में कृषि उत्पादों का आयात नहीं होना चाहिए। तथा न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) आपात स्थिति में ही लगायी जाए।
16 – युवा किसानों के लिए विशेष फंड – देश में उद्यमिता अपनाने वाले युवा किसानों के लिए 5 करोड़ तक का स्टार्ट-अप फॉर एग्रीकल्चर फंड बनाया जाय।
किसानों के FPOs को प्रोसेसिंग यूनिट लगाने हेतु 100 करोड़ तक ब्याजमुक्त ऋण दिया जाय ।
17 – डिजिटल खेती- ड्रोन आधारित सर्वे, रिमोट सेंसिंग,स्मार्ट सेंसर, डिजिटल मौसम स्टेशन, AI आधारित फसल सलाह आदि को बढ़ाया जाय। इसके लिए बजट में विशेष प्रावधान किया जाय

धर्मेन्द्र मलिक
राष्ट्रीय प्रवक्ता
भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक

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