फतेहपुर एसपी अभिमन्यु मांगलिक की पहल: करवाचौथ पर करीब 700 महिला पुलिसकर्मियों को दिया अवकाश

फतेहपुर : पुलिस की नौकरी में त्योहारों पर भी ड्यूटी करना पुलिसकर्मियों की दिनचर्या का हिस्सा होता है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के चलते अक्सर पुलिसकर्मी अपने परिवार के साथ त्योहार नहीं मना पाते। खासकर महिला पुलिसकर्मियों के लिए करवाचौथ जैसे पर्व पर ड्यूटी करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। लेकिन इस बार फतेहपुर में पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक की एक पहल ने जिले की करीब 700 महिला पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत दी है। एसपी ने करवाचौथ का व्रत रखने वाली महिला पुलिसकर्मियों को अवकाश देने का निर्णय लिया है, ताकि वे अपने परिवार के साथ घर पर रहकर पूरे विधि-विधान और उत्साह के साथ यह पर्व मना सकें।
एसपी के इस फैसले की खास बात यह रही कि महिला पुलिसकर्मियों को छुट्टी के लिए अलग-अलग अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ा। पुलिस अधीक्षक ने स्वयं इस विषय पर पहल करते हुए महिला पुलिसकर्मियों की भावनाओं को ध्यान में रखकर अवकाश की व्यवस्था की। इस निर्णय से जिले के विभिन्न थानों और पुलिस चौकियों पर तैनात महिला कांस्टेबलों से लेकर सब-इंस्पेक्टर स्तर तक की महिला पुलिसकर्मियों को राहत मिली है।
23 थानों और 40 पुलिस चौकियों पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों को मिली राहत
फतेहपुर जिले में 23 थानों और करीब 40 पुलिस चौकियों पर महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं। पुलिस विभाग की जिम्मेदारियों के बीच इन सभी के लिए एक साथ अवकाश की व्यवस्था करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने पहले से ही वैकल्पिक सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए।
इसके लिए सभी थाना प्रभारियों से उन महिला पुलिसकर्मियों की सूची मांगी गई, जो करवाचौथ का व्रत रखना चाहती थीं। इसके बाद उनकी अनुपस्थिति में थानों और पुलिस चौकियों पर पुलिसिंग तथा कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा गया।
एसपी ने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिला पुलिसकर्मियों को अवकाश देने के साथ-साथ सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी भी पूरी तरह निभाई जाए। इस तरह विभागीय कामकाज और महिला पुलिसकर्मियों की पारिवारिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया।
एसपी बोले- पुलिस की जिम्मेदारी के साथ कर्मचारियों की भावनाएं भी महत्वपूर्ण
पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक का मानना है कि पुलिसकर्मी दिन-रात जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए काम करते हैं। ऐसे में उनके व्यक्तिगत जीवन, पारिवारिक जिम्मेदारियों और धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना भी जरूरी है।
उनके मुताबिक, पुलिस की जिम्मेदारी जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण पुलिसकर्मियों की पारिवारिक और धार्मिक भावनाएं भी हैं। त्योहार परिवार के साथ मनाने का अवसर देते हैं और महिला पुलिसकर्मियों को भी यह अवसर मिलना चाहिए।
बताया गया कि अभिमन्यु मांगलिक ने इससे पहले भदोही में तैनाती के दौरान भी करवाचौथ पर महिला पुलिसकर्मियों को अवकाश देने की पहल की थी। अब फतेहपुर में भी उन्होंने इसी व्यवस्था को आगे बढ़ाया है।
एसपी के इस फैसले से महिला पुलिसकर्मियों में खुशी का माहौल है। कई महिला पुलिसकर्मियों के लिए यह अवसर खास इसलिए भी है, क्योंकि पुलिस सेवा में आने के बाद उन्हें त्योहारों पर भी अक्सर ड्यूटी करनी पड़ती रही है।
महिला कांस्टेबल कुमारी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि छह साल के सेवाकाल में यह पहला मौका है, जब वह करवाचौथ पर घर में रहकर अपने परिवार के साथ व्रत रख सकेंगी। उनके लिए यह किसी खास तोहफे से कम नहीं है।
उन्होंने बताया कि पुलिस की नौकरी में त्योहारों के दौरान भी ड्यूटी की जिम्मेदारी रहती है। ऐसे में परिवार के साथ समय बिताने और परंपरागत त्योहार मनाने का अवसर कम ही मिल पाता है। इस बार छुट्टी मिलने से वह अपने परिवार के साथ करवाचौथ मना सकेंगी।
पुलिस की नौकरी बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। कई बार त्योहारों के दिन भी ड्यूटी करनी पड़ती है और परिवार के साथ समय बिताना संभव नहीं हो पाता। जबकि करवाचौथ पर अधिकांश महिला पुलिसकर्मी निर्जला व्रत रखती हैं। ऐसे में पूरे दिन फील्ड में रहकर धूप और काम के दबाव के बीच ड्यूटी करना काफी कठिन हो जाता है। व्रत के दौरान पानी और भोजन के बिना लगातार काम करना भी परेशानी भरा होता है।
महिला पुलिसकर्मियों को इस बार अवकाश मिलने से बिना ड्यूटी की चिंता और मानसिक दबाव के अपने परिवार के साथ त्योहार मना सकेंगी। इससे उन्हें व्यक्तिगत जीवन और नौकरी के बीच बेहतर संतुलन बनाने का अवसर मिलेगा।
कौन हैं आईपीएस अभिमन्यु मांगलिक?
महिला पुलिसकर्मियों को करवाचौथ पर अवकाश देने वाले फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले हैं।
सिविल सेवा में आने से पहले उनका शैक्षणिक और पेशेवर बैकग्राउंड कॉमर्स का रहा है। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की पढ़ाई की थी। यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल करने से पहले वह एक निजी मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत थे, जहां उनका सालाना पैकेज करीब 16 लाख रुपये बताया जाता है।
आईपीएस बनने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पुलिस विभाग की जिम्मेदारियां संभालीं। फतेहपुर में तैनाती से पहले वह भदोही में पुलिस अधीक्षक और सहारनपुर में एसपी सिटी के पद पर भी कार्य कर चुके हैं।
सख्त पुलिसिंग के साथ कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता की पहल
अभिमन्यु मांगलिक को उनकी सख्त पुलिसिंग और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी जाना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह अब तक 41 से अधिक पुलिस मुठभेड़ों का नेतृत्व कर चुके हैं। इनमें वाराणसी में डेढ़ लाख रुपये के इनामी अपराधी के खिलाफ की गई कार्रवाई भी शामिल बताई जाती है।
उनकी कार्यशैली का एक पक्ष अपराध और कानून-व्यवस्था को लेकर सख्ती है, जबकि दूसरा पक्ष पुलिस विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों की व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों को समझना है।
फतेहपुर में करवाचौथ पर महिला पुलिसकर्मियों को अवकाश देने का फैसला इसी संवेदनशील पहल के रूप में देखा जा रहा है। करीब 700 महिला पुलिसकर्मियों को मिली इस राहत ने एक बार फिर यह चर्चा शुरू की है कि पुलिस विभाग में अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ कर्मचारियों के पारिवारिक जीवन का ध्यान रखना भी कितना जरूरी है।
कुल मिलाकर, फतेहपुर एसपी अभिमन्यु मांगलिक की इस पहल से उन महिला पुलिसकर्मियों को अपने परिवार के साथ करवाचौथ मनाने का अवसर मिला है, जो वर्षों से त्योहारों पर ड्यूटी की जिम्मेदारियों के चलते घर से दूर रहती थीं। खाकी की जिम्मेदारियों के बीच उनके पारिवारिक जीवन को महत्व देने का यह निर्णय पुलिस विभाग में मानवीय दृष्टिकोण की एक उल्लेखनीय मिसाल के रूप में सामने आया है।