शामली में खनन माफियाओं पर किसानों के गंभीर आरोप, जमीन पर कब्जे जैसी स्थिति और पानी की धारा मोड़ने का आरोप हाईकोर्ट जाने की तैयारी

शामली में खनन माफियाओं पर किसानों के गंभीर आरोप, जमीन पर कब्जे जैसी स्थिति और पानी की धारा मोड़ने का आरोप : हाईकोर्ट जाने की तैयारी

शामली : शामली में मंडावर-खुरगान सीमा पर कथित अवैध खनन को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती नजर आ रही है। किसानों ने खनन करने वालों पर निर्धारित पट्टा क्षेत्र से बाहर खनन करने, कृषि भूमि को नुकसान पहुंचाने और पानी की धारा मोड़ने के गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि खनन के चलते उनकी जमीन बर्बाद हो रही है और खेतों तक पानी पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। अब किसानों ने दो टूक कहा है कि यदि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो वे न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

पट्टे की जगह कहीं और खनन का आरोप

मंडावर और खुरगान गांव की सीमा पर खनन को लेकर एक किसान ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए बताया कि चार भाइयों की करीब 96 बीघा जमीन है, जबकि लगभग 200 बीघा जमीन उनके बाबा के नाम पर है। किसान का आरोप है कि खनन गतिविधियों के कारण उनकी कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। उनका दावा है कि निर्धारित पट्टा क्षेत्र को छोड़कर दूसरी जगह खनन किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

पानी की धारा मोड़ने से खेतों की सिंचाई पर संकट

किसान ने आरोप लगाया कि खनन के दौरान पानी की प्राकृतिक धारा का रुख मोड़ दिया गया है। इससे खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा और किसानों को सिंचाई के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान का कहना है कि एक तरफ जमीन को नुकसान पहुंच रहा है, तो दूसरी तरफ पानी की आपूर्ति बाधित होने से खेती पर भी संकट खड़ा हो गया है।

किसानों का सवाल—आखिर कब होगी कार्रवाई ?

किसान के मुताबिक, इस समस्या का असर केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के कई किसान इससे परेशान हैं। किसानों को आशंका है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उनकी कृषि भूमि को और नुकसान हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, खनन की वैधता की पड़ताल करने और पानी की धारा को पूर्ववत कराने की मांग की है।

प्रशासन से न्याय नहीं मिला तो हाईकोर्ट जाएंगे किसान

अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए किसान ने साफ कहा कि वे अपनी जमीन और खेती को बर्बाद होते नहीं देख सकते। यदि प्रशासन ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की और कथित खनन बंद नहीं हुआ, तो वे हाईकोर्ट का रुख करेंगे।

अब बड़ा सवाल यह है कि मंडावर-खुरगान सीमा पर खनन निर्धारित पट्टे के दायरे में हो रहा है या उससे बाहर? क्या वास्तव में पानी की धारा मोड़ी गई है? किसानों के इन गंभीर आरोपों पर प्रशासन और खनन विभाग की जांच तथा कार्रवाई का इंतजार है।

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