मुजफ्फरनगर में हुए 2013 दंगों के दौरान के एक मुकदमे में कोर्ट में पेश हुए पूर्व विधायक उमेश मलिक 
उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर में हुए 2013 के दंगों के दौरान यानी कवाल में हुए तीहरे हत्याकांड के मात्र सात दिन पहले 20 अगस्त 2013 को थाना शाहपुर क्षेत्र के गांव शोरम में दो जाट समुदाय के दो छात्र जो कि मूल निवासी तो गांव सोरम के थे मगर दोनों छात्र जाट कॉलोनी में रहकर पढ़ाई कर रहे थे जैसे ही दोनों छात्र टेंपो में सवार होकर अपने गांव शोरम पहुंचे थे तो पहले से ही अड्डे पर खड़े कुछ मुसलमान लड़कों न उन्हेंस टेंपो से उतर कर पीट दिया था इसके बाद गांव में पंचायत हुई थी। तब तत्कालीन सरकार और तत्कालीन विधायक नवाजिश आलम के दबाव के चलते प्रधान तनवीर आलम आदि के नेतृत्व में इलाके में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी । जिसमें पूर्व विधायक उमेश मलिक, पूर्व सांसद व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, पूर्व प्रधान मनीष बालियान, पूर्व प्रधान सुधीर बालियान आदि पर मुकदमा दर्ज करा दिया। जिसके बाद युवती से छेड़छाड़ को लेकर थाना जानसठ क्षेत्र के गांव कवाल में सचिन और गौरव व शाहनवाज की हत्या हो गई थी तभी मुजफ्फरनगर दंगा भी भड़क उठा था । गांव सोरम के मामले में दर्ज मुकदमे में उपरोक्त लोग आज तक कोर्ट में तारीख भुगत रहे है जिसमें आज भी मुकदमे में तारीख पूर्व विधायक बुढाना उमेश मलिक, शोरम के पूर्व प्रधान सुधीर बालियान, मनीष बालियान, राजपाल और अन्य लोग कोर्ट में पेश हुए थे ।