उत्तर प्रदेश में मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने के लिए मूल्य की निश्चितता व मिलेट्स आधारित संस्करण इकाई स्थापित की जानी चाहिए – अशोक बालियान

उत्तर प्रदेश में मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने के लिए मूल्य की निश्चितता व मिलेट्स आधारित संस्करण इकाई स्थापित की जानी चाहिए – अशोक बालियान

मुजफ्फरनगर : पीजेंट के चेयरमैन अशोक बालियान ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री  आदित्यनाथ योगी व कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही को पत्र लिखते हुए कहा है कि भारत में मोटे अनाजों की खेती के साथ-साथ मिलेट स्टार्ट अप को प्रमोट किया जा रहा है। देश में राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा मोटा अनाज उगाया जाता है। यूएई, नेपाल, सऊदी अरब, लीबिया, ओमान, मिस्र, ट्यूनीशिया, यमन, ब्रिटेन और अमेरिका में ज्वार, बाजरा, रागी, कनेरा और कुटू का निर्यात हो रहा है। बाजार में मोटे आनाजों के भाव काफी अच्छे हैं। इनके नियमित सेवन से शरीर की इम्यूनिटी भी मजबूत होती है। मिलेट्स (मोटा अनाज) की श्रेणी में ज्वार, बाजरा, रागी, कंगनी, कोदो, कुटकी, सांवा, चीना, झंगोरा, कुट्टू, चौलाई और ब्राउन टॉप का नाम शामिल है।वैसे तो दुनिया में मिलेट्स की विभिनता है,लेकिन अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023 के लिए 8 अनाजों ज्वार, बाजरा, रागी, कुटकी, सांवा, कंगनी, चीना व कोदो को शामिल किया गया था।
उत्तरप्रदेश में मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने व मिलेट्स आधारित संस्करण इकाई स्थापित किए जाने की आवश्यकता है। प्रदेश में कृषि विभाग द्वारा 01 फरवरी, 2023 से प्रदेश भऱ में मिलेट्स की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने का व्यापक अभियान चलाया गया था तथा यह भी निर्णय लिया गया था कि प्रदेश के सभी जिलों में जिलाधिकारी इन कार्यक्रमों को लागू कराए जाने के उत्तरदायी होंगे और सभी जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जाएगा। लेकिन इस पर प्रभावी कार्य करने की जरूरत है, जो अभी तक नहीं हुआ है।
भारत में मोटे अनाजों के स्वास्थ्य लाभों के बारे में पर्याप्त जागरूकता का अभाव है, जिससे इसकी निम्न मांग की स्थिति बनी हुई है। मोटे अनाज पारंपरिक एवं आधुनिक (ई-कॉमर्स) खुदरा बाज़ारों में व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उपभोक्ताओं के लिये इनकी खरीद कठिन हो जाती है।
भारत में दो वर्गों के मोटे अनाज उगाए जाते हैं। प्रमुख मोटे अनाज (Major millets) में ज्वार (sorghum), बाजरा (pearl millet) और रागी (finger millet) शामिल हैं, जबकि गौण मोटे अनाज (Minor millets) में कंगनी (foxtail), कुटकी (little millet), कोदो (kodo), वरिगा/ पुनर्वा (proso) और साँवा (barnyard millet) शामिल हैं। मोटे अनाज सूखा प्रतिरोधी (drought-resistant) होते हैं, कम जल की आवश्यकता रखते हैं।मोटे अनाज प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-फ्री या लस मुक्त होते हैं, जो उन्हें सीलियेक रोग या लस असहिष्णुता (Gluten Intolerance) वाले लोगों के लिये उपयुक्त खाद्य अनाज बनाते हैं।प्रसंस्करण तकनीकों में सुधार और मूल्य-वर्धित मिलेट-आधारित उत्पादों की उपलब्धता में वृद्धि उन्हें उपभोक्ताओं के लिये अधिक आकर्षक बना सकती है।
भारत में मोटे अनाजों की खेती और उपभोग को बढ़ावा देने के लिये पर्याप्त सहायता का अभाव रहा है, जिससे उनका विकास सीमित रह गया है। इसीलिए देश में मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने व मिलेट्स आधारित संस्करण इकाई स्थापित किए जाने की आवश्यकता है। सरकार द्वारा इनके मूल्य तय करने से व मूल्य गिरने पर बाज़ार में हस्तक्षेप करने से भी इनके उत्पादन वृद्धि की जा सकती है।
उत्तरप्रदेश में भी मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने व मिलेट्स आधारित संस्करण इकाई स्थापित किए जाने के सम्बन्ध में निरंतर चलने वाली प्रभावी कार्य योजना बनाने की आवश्यकता है,ताकि इनकी बुआई का रकबा बढ़ सके।
अत: आपसे अनुरोध है कि उत्तरप्रदेश में मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने व मिलेट्स आधारित संस्करण इकाई स्थापित किए जाने के सम्बन्ध में समुचित कार्यवाही करने का कष्ट करें।

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