हवन पूजन के साथ गाय की रश्म तेरहवीं कर इस किसान परिवार ने किया अनोखा काम

हवन पूजन के साथ गाय की रश्म तेरहवीं कर इस किसान परिवार ने किया अनोखा काम

उत्तर प्रदेश में 2017 में योगी सरकार के बनने के बाद से जहां गोवंशीय पशु की रक्षा को लेकर योगी सरकार के द्वारा कड़े कानून बनाए गए इसके बाद लोगों के द्वारा 10 से 15 साल तक गाय का दूध पिया और जब वह दूध देना बंद कर देती है तो उसे लावारिस हालत में मरने के लिए छोड़ दिया जाता है तो कहीं किसान की फसल बर्बादी का बहाना बनाया जाता है तो कहीं रोड पर एक्सीडेंट के जरिए या ट्रेन के आगे कट कर ऐसी हजारों गायों की मौत हो रही है वहीं गौकश भी हथियार लिए ऐसी ही गायों के पीछे घूमते रहते हैं।

मगर जनपद मुजफ्फरनगर की जानसठ तहसील क्षेत्र के एक गांव सलारपुर में एक परिवार के द्वारा गाय की रस्म तेहरवी की गई यही नहीं सतेंद्र लाटियान पुत्र यशपाल सिंह निवासी गांव सलारपुर ने बताया कि लगभग 25 साल पहले उनके घर में मौजूद एक देशी गाय ने देशी बछिया दी थी यह बच्चा बेहद सुंदर और आकर्षक भी थी जिसे उन्होंने अपने बच्चों की तरह पाल पोसकर बड़ा किया उन्होंने बताया कि यह इस गाय ने रोजाना 30 से भी अधिक लीटर दूध उनके परिवार को पिलाया है और पैदा होने से लेकर मरने तक यह गए उनके घर में रही सनातन धर्म में गाय को पूजने का प्रावधान है और गाय को माता भी कहा जाता है इसी बात को ध्यान में रखते हैं हुए उन्होंने इस गाय का अंतिम संस्कार किया अंतिम संस्कार के दौरान भी ढोल नगरों के साथ इस गाय को अपने ही खेतों में दफनाया गया।

आज इस गाय की मौत को 13 दिन हो चुके हैं उसी को लेकर जिस तरह इंसान की मौत के बाद परिवार उनकी रस्म 13वीं करता है जिसमें हवन होता है हवन के बाद कन्याओं को भोजन कराया जाता है और उसके बाद मृत्यु भोज कराया जाता है इस तरह सतेंद्र लाटियान के द्वारा भी ऐसा ही कराया गया उन्होंने पंडित को बुलवाकर परिवार और मोहल्ले के लोगों के साथ विधि विधान के साथ हवन पूजन किया जिसमें गाय के चित्र को रखकर उसे श्रद्धांजलि भी दी गई और उसके बाद कन्याओं को भोजन कराकर गांव के भी लोगों को भोजन कराया इस दौरान गांव के साथ-साथ इलाके के जिम्मेदार लोगों ने भी सतेंद्र की काफी सराहना की उन्होंने कहा यह एक मिसाल कायम की गई है जिस तरह गाय को लावारिस हालत में करने के लिए छोड़ दिया जाता है 5 साल से सतेंद्र लाती ने बिना दूध देने के बावजूद भी इस गाय को अपने घर में रखा उसकी सेवा की और फिर उसकी मौत के बाद उसकी 13वीं की भी रश्म पूरी कराई। किसान सतेंद्र के द्वारा गाय की रश्म तहरवी करने को लेकर लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं और यह भी कह रहे हैं कि गौ रक्षा का यह एक अनोखा तरीका है और सबको सतेंद्र के परिवार से सीख लेनी चाहिए

 

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