सामाजिक सरोकारों की कहानी लेकर आ रही है विकास बालियान की फिल्म ‘बाप की इज्जत’ आज शाम 5 बजे रिलीज होगा ट्रेलर, दशहरे के बाद दो भागों में आएगी फिल्म

सामाजिक सरोकारों की कहानी लेकर आ रही है विकास बालियान की फिल्म ‘बाप की इज्जत’

आज शाम 5 बजे रिलीज होगा ट्रेलर, दशहरे के बाद दो भागों में आएगी फिल्म

मुजफ्फरनगर : सिनेमा की दुनिया में जहां लोकप्रियता और कमाई की दौड़ में कई बार सामाजिक सरोकार पीछे छूट जाते हैं, वहीं फिल्म निर्माता, निर्देशक और लेखक विकास बालियान अपनी फिल्मों के माध्यम से समाज, परिवार, रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े विषयों को प्रमुखता दे रहे हैं। उनकी आगामी फिल्म ‘बाप की इज्जत’ एक पिता और उसकी इकलौती बेटी के भावनात्मक रिश्ते पर आधारित है। फिल्म का ट्रेलर आज शाम 5 बजे सुखराग मूवीज के यूट्यूब चैनल पर रिलीज होगा। दशहरे के बाद फिल्म को दो भागों में दर्शकों के सामने लाने की तैयारी है।
फिल्म की कहानी, कॉन्सेप्ट, पटकथा और संवाद विकास बालियान ने लिखे हैं। निर्देशन शिवांक बालियान और विकास बालियान ने संयुक्त रूप से किया है। फिल्म की निर्माता श्रीमती सुमन बालियान हैं। कैमरे की जिम्मेदारी राजा और जी.के. महुर ने संभाली है। मेकअप आर्टिस्ट रचना जांगड़ा, प्रोडक्शन कंट्रोलर रमेश चंद्र आर्य और चीफ असिस्टेंट डायरेक्टर गौतम अक्की हैं।
फिल्म में वर्षा ठाकुर मुख्य भूमिका में हैं, जो पहली बार सुखराग मूवीज के लिए काम कर रही हैं। वह बेटी के किरदार में नजर आएंगी। पिता की भूमिका दूरदर्शन और आकाशवाणी में 38 वर्षों से अभिनय कर रहे दिनेश त्यागी निभा रहे हैं। फिल्म में शिवांक बालियान, रमेश चंद्र आर्य, रचना जांगड़ा, विपिन चौधरी जाज, मधु चौधरी, पारुल तिवारी, विशु त्यागी, रिया चौधरी, डॉ. ब्रजवीर सिंह प्रधान, सुभाष देव भारती और अक्की गौतम सहित अनेक कलाकार हैं। विकास बालियान की भी फिल्म में छोटी मगर महत्वपूर्ण भूमिका है।
पिता के त्याग और बेटी की समझदारी की कहानी
‘बाप की इज्जत’ की कहानी एक ऐसे पिता के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी इकलौती बेटी की शादी और खुशहाल भविष्य के लिए अपनी सामर्थ्य से आगे बढ़कर सब कुछ करने को तैयार है। बेटी की खुशियों के लिए वह अपनी जमा-पूंजी, संपत्ति और जीवनभर की कमाई तक दांव पर लगाने से पीछे नहीं हटता। लेकिन सवाल यह है कि क्या वह अपनी बेटी को हर खुशी दे पाने में सफल होता है? क्या बेटी अपने पिता के त्याग और आर्थिक परिस्थितियों को समझ पाती है?
फिल्म का भावनात्मक पक्ष इसी सवाल में छिपा है कि बेटी अपने पिता से अधिक से अधिक सुविधाएं और महंगे सामान की अपेक्षा करे या उनकी परिस्थितियों को समझते हुए कहे कि पिता जी, जितनी चादर है, उतने ही पैर फैलाइए। मेरे लिए आपकी इज्जत, आपका सुकून और आपका सम्मान किसी भी महंगे सामान से अधिक महत्वपूर्ण है।
यह कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि उन तमाम माता-पिताओं की भावनाओं को छूने का प्रयास है, जो बच्चों की खुशियों के लिए अपनी जरूरतों और इच्छाओं को पीछे छोड़ देते हैं। पिता अक्सर अपनी परेशानियां जाहिर नहीं करता, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उसे दर्द नहीं होता। वह अपनी संतान के चेहरे पर मुस्कान देखने के लिए संघर्ष करता रहता है। ऐसे में संतान का भी दायित्व है कि वह माता-पिता के त्याग को समझे और उनकी आर्थिक हैसियत से अधिक अपेक्षाएं न रखे।
सामाजिक मूल्यों को प्राथमिकता देते हैं विकास बालियान
विकास बालियान की फिल्मों की विशेषता यह है कि वह मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश देने का प्रयास करते हैं। जब कुछ निर्माता व्यावसायिक लोकप्रियता के लिए अश्लीलता और अनावश्यक उत्तेजना का सहारा लेते हैं, तब विकास बालियान पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक समस्याओं और मानवीय रिश्तों पर आधारित कहानियों को प्राथमिकता देना पसंद करते हैं। उनके लिए सिनेमा केवल कमाई का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सोचने के लिए प्रेरित करने का जरिया भी है।
उनकी ‘गरीब की बेटी’, ‘गरीबी’, ‘संस्कार’, ‘मजबूर मां’ और ‘धाकड़ दोस्ती’ जैसी फिल्मों में गरीबी, पारिवारिक संस्कार, दोस्ती और संघर्ष जैसे विषयों को स्थान मिला है। ‘गरीब की बेटी’ के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि सीमित आर्थिक संसाधन किसी की प्रतिभा और सफलता के रास्ते की अंतिम बाधा नहीं हैं। मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है।
उनका दस मिनट से अधिक अवधि का ‘अन्नदाता’ गीत किसानों की आवाज को सामने लाने का प्रयास है। वहीं लगभग 10 मिनट 30 सेकंड का गीत ‘खता तो बताओ’ प्रेम में मिली पीड़ा के बावजूद अपने साथी को बदनाम न करने का संदेश देता है। इन रचनाओं में अलग-अलग विषय हैं, लेकिन इनके केंद्र में मानवीय संवेदनाएं और सामाजिक जिम्मेदारी दिखाई देती है।
व्यावसायिक सफलता हर फिल्म के लिए महत्वपूर्ण होती है, लेकिन सामाजिक विषयों को प्राथमिकता देना भी अपने आप में एक प्रतिबद्धता है। विकास बालियान की कोशिश है कि फिल्म दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ उनके मन में कोई सकारात्मक विचार भी छोड़े।
मुजफ्फरनगर की प्रतिभाओं को मिल रहा अवसर
‘बाप की इज्जत’ की एक खास बात यह है कि फिल्म में लगभग 90 प्रतिशत कलाकार मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्र से संबंधित हैं। विकास बालियान लगातार स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी मान्यता है कि छोटे शहरों और गांवों में भी प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत है तो उसे उचित मंच देने की।
वर्ष 2026 से सुखराग मूवीज पर उनकी फिल्मों का सिलसिला लगातार जारी है। अब तक पांच से अधिक फिल्में आ चुकी हैं, जबकि छह से अधिक फिल्मों के आने की तैयारी है और लगभग आधा दर्जन अन्य परियोजनाओं पर काम शुरू होने की जानकारी है। लगातार फिल्म निर्माण स्थानीय कलाकारों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए अवसर पैदा करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
फिल्म की वास्तविक सफलता का आकलन रिलीज के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया से होगा, लेकिन स्थानीय प्रतिभाओं को साथ लेकर सामाजिक विषयों पर काम करना अपने आप में उल्लेखनीय प्रयास है।
रिश्तों की इज्जत ही फिल्म का मूल संदेश
आज शाम पांच बजे ट्रेलर रिलीज होने के साथ ‘बाप की इज्जत’ को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ने की उम्मीद है। लगभग सवा दो घंटे की इस फिल्म को दो भागों में रिलीज करने की योजना है।
फिल्म का मूल सवाल बेहद सरल, लेकिन भावनात्मक है—क्या माता-पिता की खुशियों और सम्मान का ख्याल रखना भी संतान की जिम्मेदारी नहीं है? पिता अपनी बेटी के लिए पूरी जिंदगी संघर्ष करता है, लेकिन उसके लिए सबसे बड़ी खुशी महंगे उपहार या भव्य आयोजन नहीं, बल्कि बेटी की समझदारी और उसका सम्मान भी हो सकता है।
पिता की इज्जत केवल उसके नाम या सामाजिक प्रतिष्ठा में नहीं, बल्कि उस त्याग, संघर्ष और प्रेम में भी होती है, जिसे वह अपनी संतान की खुशियों के लिए जिंदगी भर निभाता है। विकास बालियान की ‘बाप की इज्जत’ इसी भावनात्मक विचार को दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास है।

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