घटती जनसंख्या और बढ़ता नशा समाज को ले डूबेगा – चौधरी संजीव तोमर

देश खाप 84 के चौधरी संजीव तोमर ने की राकेश टिकैत से मुलाकात

कई अहम सामाजिक मुद्दों पर हुई चर्चा

 घटती जनसंख्या और बढ़ता नशा समाज को ले डूबेगा – चौधरी संजीव तोमर

उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर में बुधवार को देश खाप (तोमर) के चौधरी संजीव तोमर ने तोमर खाप के एक प्रतिनिधि मंडल के साथ मुजफ्फरनगर स्थित किसान नेता चौधरी राकेश टिकैत के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की इस दौरान चौधरी राकेश टिकैत ने सभी मेहमानों का शॉल भेट कर स्वागत किया । गौरतलब है कि देश खाप के मुखिया चौधरी सुरेंद्र सिंह का पिछले दिनों बीमारी के चलते निधन हो गया था इसके बाद सामाजिक परंपरा के अनुसार उनके ज्येष्ठ पुत्र संजीव तोमर को समाज के जिम्मेदार लोगों ने पगड़ी पहनकर देश खाप का नया चौधरी नियुक्त किया था । देश खाप का चौधरी बनने के बाद चौधरी संजीव तोमर पहली बार मुजफ्फरनगर पहुंचे हैं। बता दें कि चौधरी संजीव तोमर चौधरी राकेश टिकैत की बहन के बेटे हैं।
इस दौरान चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि चौधरी संजीव तोमर मुजफ्फरनगर पहुंचे हैं क्योंकि चौधरी संजीव तोमर को पगड़ी बंधी है । ये यहां पर मिलने आए हैं और यह परंपरा है कि जब नया खाप चौधरी बनता है तो उसको बुलवाया जाता है ये खापों की परंपरा है। सभी इन्हें भी बुलाकर अपने-अपने यहां बुलाकर इनका स्वागत करें और यह परंपराएं हमारे आगे तक चलती रहे। मिलकर जो सामाजिक मुद्दे हैं उन पर काम करें खाप पंचायतों के जो चौधरी है जो अपनी खापों के चौधरी है। वे चौधरी सभी अपनी खापों में सुधार करें नशा है भ्रूण हत्या है पेड़ लगाना है सभी सामाजिक मुद्दों पर काम करें ।

वहीं देश खाप के चौधरी संजीव तोमर ने कहा कि मेरे ऊपर जो जिम्मेदारी आई है दो बड़ी जिम्मेदारी पहले से ही है एक तो हमारी खाप बड़ी है जब बड़ी खाप होती है और उसकी पगड़ी आती है तो जिम्मेदारी भी बड़ी है जो बालियान खाप है मैं उनका भांजा हूं इसलिए भी बड़ी जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने कहा कि हमारी जो मुहिम है समाज में जो कमियां है नशा मुक्त समाज संदेश देना है हमारी मुहिम के तहत अगर एक अगर एक बच्चा भी नशे से बच गया इसमें हम अपने आप को कामयाब समझेंगे।
उन्होंने कहा कि खाप प्रथा में विश्वास तो अभी बहुत लोग रख रहे हैं एक तो काम करना चाहिए उतने काम खाप चौधरी नहीं कर पाते कोई भी कारण हो अगर इसमें खाप चौधरी अगर मन से लगे तो मान सम्मान बहुत ज्यादा है।
दहेज और कन्या भ्रूण हत्या को लेकर उन्होंने कहा कि जो पंचायत 1956 में हुई थी बहुत खराब थी लेकिन धीरे-धीरे जैसे आर्थिक स्थिति ठीक हुई तो इसलिए थोड़ी दहेज प्रथा भी बढ़ी बच्चिया पढ़ी मगर अब तो शादी के ही लाले पड़ रहे हैं भेज तो दूर की बात है दहेज की लोग कहां से बात आ गई अब तो शादी हो जाए तो वही ही बहुत अच्छा है क्योंकि पिछले एक समय में कन्या भ्रूण हत्या बहुत ज्यादा हुई है 2005 से लेकर 2010 के बीच बहुत भ्रूण हत्या हुई है इसका परिणाम अब देखने को मिल रहा है । लड़कों की शादी नहीं हो पा रही है ।
उन्होंने कहा कि जो ज्यादा उम्र में बच्चों की शादी करते हैं। तो फिर शादी कम चल पाती है इसलिए नहीं चल पाती कि अब पढ़े-लिखे लड़के और लड़कियां है नौकरी करते हैं दूसरे पर निर्भर नहीं है इसी वजह से थोड़ी दिक्कत आ रही है। पारिवारिक लोग बच्चों को समझाया जाए बच्चों की शादी की जो उम्र है उसको घटाना पड़ेगा फिर ज्यादा गड़बड़ नहीं होगी अब तो 60% का औसत आ रहा है। उन्होंने घाटी जनसंख्या पर भी चिंता जाहिर की कि एक तो हमारी जनसंख्या घट रही है। जनसंख्या के बगैर कुछ नहीं है तो घर का दरवाजा ही बंद हो जाता है क्योंकि एक-एक बच्चे हैं घरों में इसमें जनसंख्या की बात करी जाएगी और दहेज और नशे के खिलाफ बात होगी इसमें बहुत सारे सामाजिक मुद्दों पर विभाजित होगी उन्होंने कहा की घटती जनसंख्या और बढ़ता नशा समाज को ले डूबेगा

 

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