देवबंद जेल में ‘हाफ एनकाउंटर’ मामलों की न्यायिक पड़ताल, जज ने बंदियों से की सीधी पूछताछ

देवबंद (उत्तर प्रदेश): प्रदेश में पुलिस के तथाकथित ‘हाफ एनकाउंटर’ एक बार फिर बहस के केंद्र में हैं। इसी संदर्भ में देवबंद जेल में उस समय हलचल मच गई जब न्यायिक अधिकारी परविंदर सिंह ने अचानक निरीक्षण कर उन बंदियों से बातचीत की, जिन्हें कथित मुठभेड़ों में गोली लगने के बाद जेल भेजा गया है।
बंदियों से सीधे पूछे गए सवाल
निरीक्षण के दौरान जज ने बंदियों की शारीरिक स्थिति का जायजा लिया और उनसे विस्तार से पूछा कि मुठभेड़ के समय घटनाक्रम क्या था। जानकारी के अनुसार, दो बंदियों ने दावा किया कि उन्हें पहले जमीन पर लिटाया गया और उसके बाद गोली मारी गई। उनका कहना है कि गोलीबारी किसी सक्रिय मुठभेड़ के दौरान नहीं हुई, बल्कि काबू में लेने के बाद फायर किया गया।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मेडिकल रिकॉर्ड और दस्तावेज तलब
जज ने जेल प्रशासन से संबंधित बंदियों के मेडिकल रिकॉर्ड, प्राथमिक उपचार की रिपोर्ट और केस से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा। यह भी जानने की कोशिश की गई कि घटना के समय मौके पर कौन-कौन से पुलिसकर्मी मौजूद थे और गोली लगने के बाद मेडिकल जांच कब कराई गई।
सूत्रों के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान जेल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों में हलचल देखी गई।
‘हाफ एनकाउंटर’ पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में पुलिस द्वारा की गई मुठभेड़ों को लेकर मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने समय-समय पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना रहा है कि कई मामलों में निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई या नहीं।
वहीं पुलिस का आधिकारिक पक्ष यह रहा है कि मुठभेड़ के दौरान आरोपी भागने या हमला करने की कोशिश करते हैं, जिसके जवाब में मजबूरन फायरिंग करनी पड़ती है।
आगे क्या ?
देवबंद जेल में की गई यह न्यायिक पड़ताल इस पूरे मुद्दे को नई दिशा दे सकती है। अब नजर इस बात पर है कि जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या किसी प्रकार की आगे की कार्रवाई या सिफारिश की जाती है।
फिलहाल मामला जांच के दायरे में है और अंतिम निष्कर्ष रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।