भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी विकास की डगर: 15 दिन पहले बनी सड़क पर उगी घास, PWD के दावों की खुली पोल
मुजफ्फरनगर: प्रदेश में जहाँ एक ओर योगी सरकार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रही है, वहीं दूसरी ओर मुजफ्फरनगर के लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी और ठेकेदार सरकार के मंसूबों पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
ताजा मामला जनपद मुजफ्फरनगर के पीनना से सलेमपुर जाने वाल मार्ग का है, जहाँ विकास के नाम पर सरकारी धन की ऐसी बंदरबांट हुई है कि नई सड़क महज दो हफ्ते भी अपनी चमक बरकरार नहीं रख सकी।
सड़क है या घास का मैदान?
आरटीआई एक्टिविस्ट सुमित मलिक के अनुसार पीनना गांव से सलेमपुर तक बनी 3 किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण कार्य अभी लगभग दो सप्ताह पहले ही पूरा हुआ था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि डामर वाली इस सड़क के बीचों-बीच अब घास उग आई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क इतनी कमजोर और घटिया सामग्री से बनी है कि वह हाथ से उखड़ने लगी है। सड़क के दोनों ओर मजबूती के लिए लगाई जाने वाली ईंटों का भी अता-पता नहीं है, जिससे पहली ही बारिश में सड़क के बह जाने का खतरा पैदा हो गया है।
RTl कार्यकर्ता ने मुख्यमंत्री से की शिकायत
इस धांधली को लेकर किसान और सामाजिक कार्यकर्ता सुमित मलिक ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
“यह सीधे तौर पर जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी धन का दुरुपयोग है। जिस सड़क को सालों चलना चाहिए था, उसमें दो हफ्ते में ही घास उगना यह बताता है कि PWD के अधिकारियों और निर्माण कंपनी के बीच कितनी गहरी सांठगांठ है।”
— सुमित मलिक, शिकायतकर्ता
शिकायतकर्ता सुमित मलिक ने निर्माण कंपनी के खिलाफ एफआईआर और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
क्षेत्र की जनता में इस बात को लेकर भारी रोष है कि आखिर किसकी शह पर मानक को ताक पर रखकर यह सड़क बनाई गई? क्या विभाग के जेई और एक्सियन ने मौके पर जाकर गुणवत्ता की जांच नहीं की थी?
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस शिकायत पर क्या संज्ञान लेता है और दोषियों के खिलाफ बाबा का ‘बुलडोजर’ कानूनी रूप से कब चलता है।