मंत्री कपिल देव अग्रवाल के प्रयासों से पीस लाइब्रेरी परिसर के समग्र विकास का मार्ग हुआ प्रशस्त

मंत्री कपिल देव अग्रवाल के प्रयासों से पीस लाइब्रेरी परिसर के समग्र विकास का मार्ग हुआ प्रशस्त

मुज़फ्फरनगर, 3 जून। नगर के मध्य स्थित ऐतिहासिक पीस लाइब्रेरी परिसर के लंबे समय से लंबित प्रकरण के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सकारात्मक पहल सामने आई है। उत्तर प्रदेश सरकार में स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री एवं नगर विधायक कपिल देव अग्रवाल के सतत प्रयासों, दूरदर्शी नेतृत्व एवं जनहितकारी पहल के परिणामस्वरूप इस बहुमूल्य सार्वजनिक संपत्ति के विकास का मार्ग अब प्रशस्त होता दिखाई दे रहा है।

मंत्री कपिल देव अग्रवाल के अनुरोध एवं सकारात्मक संवाद के उपरांत पीस लाइब्रेरी के सचिव रहे अधिवक्ता सुशील कुमार ने परिसर से संबंधित विभागीय एवं न्यायिक प्रक्रियाओं के समाधान हेतु सहमति प्रदान की है। मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि अधिवक्ता सुशील कुमार द्वारा न्यायालय के माध्यम से आवश्यक विधिक औपचारिकताओं को पूर्ण कर परिसर को नगर पालिका परिषद के सुपुर्द करने की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाएगी।

उन्होंने कहा कि नगरहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस महत्वपूर्ण स्थल का सुनियोजित एवं आधुनिक विकास सुनिश्चित किया जाएगा। प्रस्तावित योजना के अंतर्गत यहां अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त बहुउद्देशीय कॉम्प्लेक्स, आधुनिक सार्वजनिक पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र तथा पर्याप्त वाहन पार्किंग व्यवस्था विकसित की जाएगी। यह परियोजना विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं, शोधार्थियों एवं आम नागरिकों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

इसके अतिरिक्त, नगर में लगातार बढ़ रही यातायात एवं पार्किंग संबंधी चुनौतियों के समाधान में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आधुनिक शहरी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जाने वाला यह परिसर नगर की आधारभूत संरचना को नई मजबूती प्रदान करेगा।

मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि उनकी प्राथमिकता नगरवासियों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा सार्वजनिक परिसंपत्तियों का अधिकतम उपयोग जनकल्याण के लिए सुनिश्चित करना है। पीस लाइब्रेरी परिसर का विकास इसी संकल्प का एक महत्वपूर्ण उदाहरण होगा, जो नगर के शैक्षिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक विकास को नई दिशा और गति प्रदान करेगा।

नगर के प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों एवं विभिन्न वर्गों के लोगों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे मुज़फ्फरनगर के विकास के इतिहास में एक दूरगामी एवं ऐतिहासिक कदम बताया है। उनका मानना है कि यह परियोजना न केवल नगर की पहचान को नई ऊंचाई प्रदान करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक संसाधन के रूप में स्थापित होगी।

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