भूमि विवाद मामले में रोहाना शुगर मिल को न्यायालय से मिली राहत
चीनी मिल के पास अपनी कुल भूमि 35.5270 हेक्टेयर जिसमें खसरा नं0 635/1 से 635/10 तक रकबा 2.050 हैक्टेयर भी है सम्मलित
उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर में रोहाना शुगर मिल की स्थापना 1933 में हुई थी तथा उक्त चीनी मिल का अधिग्रहण उत्तर प्रदेश राज्य
सरकार द्वारा वर्ष 1984 में किया गया था एवं इसका प्रबन्धन उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम को दिया गया था।
जिसके बाद चीनी मिल को राज्य सरकार द्वारा इण्डियन पोटाश लिमिटेड को स्लम सेल
ऐग्रीमेन्ट के अर्न्तगत दिनांक 12.10.2010 को बेचा गया था और तत्सम्बन्धित विक्रय अभिलेखो को तहसील मुजफ्फरनगर में दिनांक 07.12.2010 को पंजीकृत भी करा दिया गया था । उस समय चीनी मिल के पास 17.054 हेक्टेयर भूमि थी क्षेत्र के किसानों की सुविधाओं के देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सरकार द्वारा 2500 टी0सी0डी चीनी मिल के विस्तारिकरण करने हेतु 18.473 हैक्टेयर भूमि अर्जन अधिनियम के अर्न्तगत राज्यपाल के नोटिफिकेशन से अधिग्रहित चीनी मिल के लिए की गई। इस प्रकार चीनी मिल के पास अपनी कुल भूमि 35.5270 हैक्टेयर हो गई थी। चीनी मिल की पंजीकृत भूमि में खसरा नंबर 635/1 से 635/10 तक जिसका रकबा 2.050 हैक्टेयर है, भी सम्मलित है। इस भूमि पर कुछ लोगों द्वारा अपने 45 वर्ष पूर्व भूमि के पट्टे केन्सिलेशन का दावा जिला मजिस्ट्रेट, मुजफ्फरनगर के न्यायालय में दायर किया गया। जिला मजिस्ट्रेट मुजफ्फरनगर द्वारा चीनी मिल के विरूद्ध आदेश दिनांक 24.08.2020 को पारित कर दिये थे। आई०पी०एल० चीनी मिल ने उक्त आदेश के विरूद्ध रिवीजन आयुक्त, सहारनपुर मण्डल सहारनपुर के न्यायालय में दायर किया था। मंडलआयुक्त द्वारा अपने आदेश में उक्त रिवीजन को खारिज कर दिया गया आई०पी०एल० चीनी मिल द्वारा आदेशों के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में रिट याचिकाऐं तत्समय दाखिल की है। जिसमें उच्च न्यायालय ने अपीलों को स्वीकार करते हुए अपने आदेश दिनांक 06.11.2024 मे सभी पक्षकारों को नोटस जारी करते हुए स्टे के आदेश पारित कर दिये है। उक्त आदेश की प्रमाणित प्रति आयुक्त सहारनपुर मण्डल सहारनपुर को प्रेषित की गयी आयुक्त सहारनपुर मंडल द्वारा ने अपने पत्र दिनांक 11.01.2025 के द्वारा जिला मजिस्ट्रेट मुजफ्फर नगर को निर्देश
जारी करते हुए उक्त उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाये, के निर्देश
दिये है।
आरोप है कि इण्डियन पोटाश लिमिटेड की छवि को कुछ लोगों के द्वारा धूमिल करने का प्रयास मात्र था, जो कि उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के उक्त आदेश से स्वतः ही समाप्त हो गया है।