भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत में आठ प्रस्ताव पारित

उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सरकारों के खिलाफ किसानों का बिगुल बज चुका है। जिसके चलते सोमवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत का आयोजन नवीन मंडी स्थल पर किया गया जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। इस महापंचायत में दूर दराज से आए किसान नेताओं ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि यह सरकार किसान विरोधी है केवल किसानों से वाइड करती है लेकिन उन वादों को नहीं निभाती। सरकार किसानों को कर्ज पर कर्ज देकर बर्बाद करना चाहती है किसान अपनी फसलों का वाजिब दाम मांगता है तो सरकार उसे कर्ज देने की बात करती है। किसान महापंचायत में सब की सहमति से आठ प्रस्ताव पारित किए गए जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली महा पंचायत में यह प्रस्ताव लागू करने की बात कही गई जिसमें कहा गया कि भारत कृषि प्रधान देश है जो पूरी तरह से किस पर निर्भर है।

जिसकी मुख्य कड़ी देश का अन्नदाता है। सम्पूर्ण भारत इसी के भरोसे अपने परिवारों का पेट भर रहा है, लेकिन वर्तमान की स्थिति में यह अपने वजूद को तलाश रहा है। जल, जंगल, जमीन यह तीनों हमारे लिए ऐसे हैं जैसे मनुष्य शरीर में आत्मा। इनके बिना प्रकृति का कोई अस्तित्व ही नहीं हैं। एनडीए सरकार का तीसरा कार्यकाल शुरू हो गया है। लेकिन देश के किसान-मजदूर आदिवासी को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। यह पंचायत सरकार के इस रवैये की कठोर शब्दों में निंदा करती है और तत्काल इन सभी विषयों पर चर्चा की भी मांग भी करती है। कृषि संकट को समाप्त करने के लिए भारतीय किसान यूनियन संयुक्त रूप से निम्नांकित मसौदा प्रस्ताव इस पंचायत में पारित करती है-
महा पंचायत द्वारा पारित प्रस्ताव देश के किसानों के हित में आठ प्रस्ताव पारित किए गए जिसमें पहला प्रस्ताव गन्ने को लेकर है जिसमें कहा गया कि उत्तर प्रदेश में गन्ने का पेराई सत्र कुछ समय बाद समाप्त होने को है। लेकिन अभी तक गन्ने का भाव घोषित नहीं किया गया है। पूर्व के समय में सत्र शुरू होने से पहले सरकारों के द्वारा भाव घोषित किया जाता था। कारपोरेट के दबाव में सरकार की बदलती मानसिकता से किसान हित व जनहित को हानि पहुँच रही है। सरकार जल्द इस विषय पर निर्णय ले व भाव 500 रुपये प्रति कुन्तल घोषित करें व मिलों पर बकाया भुगतान को अविलम्ब कराया जाए।
दूसरा प्रस्ताव (व्यापक ऋणमाफी)जिसमें कहा गया कि देश का सबसे अहम वर्ग कर्ज का बोझ झेल रहा है। इसी कारण वह आत्महत्या करने पर मजबूर है। सरकारें कारपोरेट घरानों का अरबों-खरबों रुपया बिना किसी शर्त व सूचना जारी किए माफ कर देती है, इसी तरह यह पंचायत देश के किसान का सम्पूर्ण ऋणमाफ करने की मांग करती है।
तीसरा प्रस्ताव एमएसपी गारंटी कानून/सी2+50)- देश के किसान ने वर्षों से एमएसपी को गारंटी कानून का दर्जा देने की मांग के लिए अपने संघर्ष को जारी रखा है।
चौथा प्रस्ताव (एनजीटी व जीएसटी मुक्त खेती) देश का किसान जो भी यंत्र अपने कृषि कार्यों में उपयोग कर रहा है वह एनजीटी कानून के दायरे से बाहर किया जाए साथ ही खेती में उपयोग होने वाली सभी वस्तुएं, पदार्थ, बीज व यंत्र जीएसटी मुक्त किए जाएं।
विद्युत निजीकरण व संस्था निजीकरण)- केन्द्र सरकार व बहुत से प्रदेशों की सरकारें विद्युत निजीकरण का कार्य कर रही है और कुछ पूर्व समय में कर चुकी हैं। उत्तर प्रदेश इसका दंश झेल रहा है। आगरा में किसानों पर लाखों रुपया बकाया है। इन सभी विषयों को गम्भीरता से लेते हुए विद्युत निजीकरण को रोका जाए साथ ही सरकार के द्वारा जारी देश की किसी भी संस्था के निजीरकण (जो आमजनजीवन को प्रभावित करती है) को भी तत्काल प्रभाव से बन्द किया जाए।
छठा प्रस्ताव (जेनेटिकली मोडिफाईड (जीएम) बीज)- देश में सरकार जीएम बीजों को लाने का कार्य कर रही है, जो मानव जीवन, पर्यावरण व खेती के लिए बेहद खतरनाक हैं। पूर्व में बीटी कॉटन / एचटी बीटी कॉटन का दंश देश आज तक झेल रहा है। जिसके दुष्परिणाम की अनेकों रिपोर्ट सोशन मीडिया आदि के प्लेटफार्म पर प्रचारित हैं। भारतीय किसान यूनियन इस प्रकार के किसी भी ट्रायल को देशभर में नहीं होने देगा।
सातवां प्रस्ताव (भूमि अधिग्रहण) – देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों व संस्थाओं के निर्माण के लिए किसानों की जमीने अधिग्रहीत की जा रही है। किसी भी भूमि का उचित मुआवजा किसानों को नहीं दिया जा रहा है, जिसे लेकर देशभर में किसान आन्दोलन कर रहे हैं। सरकार एलएआरआर अधिनियम 2013 को लागू करने का कार्य करें साथ ही किसानों के शोषण को देशभर में बन्द करें।
और आठवां प्रस्ताव (एनपीएफ ऑन एएम)- केन्द्र सरकार हाल ही के समय में नेशनल पॉलिसी फेम वर्क ऑन एग्रीकल्चर मार्केटिंग का नया कृषि मसौदा नीति लेकर आयी है। यह राज्य व किसानों के अधिकारों पर प्रहार है। इसे तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।