मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान के एक मुकदमे में पूर्व विधायक सहित छह लोग बरी
उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर में 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगों से ठीक पहले 20 अगस्त 2013 को पूर्व विधायक उमेश मलिक सहित सात लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में आज विशेष एमपी एमएलए कोर्ट का फैसला आ गया है जिसमें कोर्ट ने पूर्व विधायक उमेश मलिक सहित 6 लोगों को बरी कर दिया है। जबकि मुकदमे में शामिल सातवें युवक सम्राट की पहले ही मौत हो चुकी है। 12 साल चले इस मुकदमे का फैसला आने के बाद उमेश मलिक सहित मुकदमे में शामिल लोगों ने राहत की सांस ली है और फैसला आने के बाद एक दूसरे को मिठाई खिलाकर और भगवान भोले शंकर के मंदिर में जलाभिषेक कर कर भगवान का शुक्रिया अदा किया और खुशियां मनाई गई।
दरअसल उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर में 2013 में तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में युवती से छेड़छाड़ को लेकर सांप्रदायिक दंगे भड़के थे जिसमें 60 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। 7 सितंबर को एक पंचायत से लौटते वक्त सांप्रदायिक दंगा भड़क उठा था और हिंदू मुस्लिम एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए थे नतीजा यह रहा था कि जो मुजफ्फरनगर और आसपास के जनपदों में हिंदू मुस्लिम भाईचारा कायम था वह पूरी तरह से समाप्त हो चुका था। और यह दंगा 27 अगस्त 2013 को बहन से छेड़छाड़ के विरोध में थाना जानसठ क्षेत्र के गांव मलिकपुरा निवासी ममेरी फुफेरे भाई सचिन और गौरव को मौत के घाट उतार दिया था। मगर 27 अगस्त 2013 से पहले ही मामूली मामूली बातों में लोगों के बीच इतनी कठौता पैदा हो गई थी कि तनाव की स्थिति बननी शुरू हो गई थी। और तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से समुदाय विशेष को प्रोत्साहन दिया जा रहा था यही कारण था कि भाजपा और हिंदूवादी नेताओं के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज होने शुरू हो गए थे। पूर्व विधायक उमेश मलिक, पूर्व प्रधान सुधीर कुमार, बिजेंदर रामपाल, नौरोज, मनीष और सम्राट के खिलाफ भी सोरम गांव के तत्कालीन प्रधान के द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया था जिसका 12 साल बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया है