भाजपा महिला मोर्चा ने महिला आरक्षण बिल को लेकर किया धरना प्रदर्शन , मुजफ्फरनगर सांसद हरेंद्र मलिक ने दी भाजपा और भाजपा महिला मोर्चा को नसीहत

भाजपा महिला मोर्चा ने महिला आरक्षण बिल को लेकर किया धरना प्रदर्शन

मुजफ्फरनगर सांसद हरेंद्र मलिक ने दी भाजपा और भाजपा महिला मोर्चा को नसीहत

सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि भारत का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मजाक है कि एक पास हुए बिल को दोबारा सदन में पेश किया गया

 

मुजफ्फरनगर : पिछले दिनों लोकसभा में लाए गए महिला शक्ति वंदन बिल को लेकर देश भर में बहस सीधी है जहां सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी विपक्ष को दोषी करार देते हुए आरोप लगा रही है कि विपक्ष ने एकजुट होकर महिला शक्ति वंदन बिल को सदन में पास नहीं होने दिया जबकि समाजवादी पार्टी सहित तमाम विपक्ष इस मामले में भारतीय जनता पार्टी को ही आरोपित कर रहा है कि तमाम विपक्ष ने इकट्ठा होकर महिला शक्ति वंदन बिल को 2023 में सदन में पास कर दिया था किसी ने भी उसका विरोध नहीं किया था और अब यह लोकतंत्र के साथ भारतीय जनता पार्टी एक भद्दा मजाक कर रही है। इसी के चलते भाजपा महिला मोर्चा के द्वारा रविवार को विपक्ष के संसद घेराव कार्यक्रम के तहत मुजफ्फरनगर में लोकसभा सांसद हरेंद्र मलिक का घेराव करने के बहाने घर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर प्रदर्शन कर वापस चले आए। वहीं सांसद नरेंद्र मलिक के एक रिश्तेदार की मृत्यु हो जाने के कारण सांसद हरेंद्र मलिक शोक संवेदना व्यक्त करने हुए गए थे इसी बीच भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा द्वारा खबर प्रसारित कराई गई की महिला मोर्चा ने सपा सांसद का घेराव किया है इस मामले में सांसद हरेंद्र मलिक ने भाजपा और महिला मोर्चा पर संवेदनहीन होने का आरोप लगाते हुए कहा कि बुलंदशहर में किसानों का मुआवजा को लेकर कोई आंदोलन चल रहा है। पार्टी के निर्देश थे कि वहां पर सपा का एक प्रतिनिधिमंडल जाना चाहिए, जिसे लीड मुझे करना था। मेरे साथ तो विषम पारिवारिक परिस्थिति हुई, मेरे छोटे बहनोई का स्वर्गवास हो गया, मैं उनकी अंत्येष्टि में चला गया था। हालांकि रात से ही पुलिस आवास पर थी। यह आप भी जानते हो कि हमें जाने से कोई नहीं रोक सकता, अगर हम जाना चाहेंगे तो जाएंगे नहीं जाना चाहेंगे तो नहीं जाएंगे। पुलिस अपना काम कर रही थी। लेकिन पुलिस का व्यवहार बड़ा मानवीय था, जब उन्हें पता चला कि परिवार में ऐसा हादसा हो गया है। उन्होंने संवेदना व्यक्त करने के अलावा अन्त्येष्टि तक साथ रहे। जानसठ इंस्पेक्टर भी आ गए थे, यहां से भी लोग गए थे। पुलिस ने और सभी को, जो प्रतिनिधि मंडल में मेरे साथ जा रहे थे। पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर साहब, एमएलए अतुल प्रधान और वहां के अध्यक्ष को रोक दिया था। वहां के किसानों का फोन आया कि हमें पता लग गया आपके परिवार में हादसा हो गया। हम चाहते हैं कि आप टेलीफोन पर हमसे बात कर ले, तो मैंने उन्हें टेलीफोन पर ही संबोधित कर दिया। बदकिस्मती है कि आप रोज किसान किसान करते हो। और जो कानून है आप उसका पालन नहीं कर रहे हो। उनकी भूमि के वाजिब दाम तक नहीं दे रहे हो। उन्हें धरने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आप उनके दाम देकर अलग करो। जब समस्या ही नहीं होगी, तो किस समाधान की मांग करेंगे।
मुझे पता लगा था कि भाजपा महिला मोर्चा की कुछ महिलाएं कल आवास पर धरना है। यह नहीं पता था कि घर में ऐसी घटना घटित हो जाएगी। मैं सुबह जल्दी निकल गया था और सबको कहा गया था कि सबकी चाय पानी की व्यवस्था कर दीजिएगा, अगर वह 50 लोग आएंगे तो उनमें से 10 को तो हम अपना बना ही लेंगे। लेकिन वह यहां पर तो नहीं आए, जब मैं सुबह जा रहा था तो ईदगाह में बाग जानकीदास के पास देखा था कि एक बोर्ड पर लिखा था कि विपक्ष के सांसदों का घेराव कर धरना दे जाएगा। हालांकि उसे पर मेरा नाम नहीं था। हास्यास्पद स्थिति यह है कि जिस मुद्दे को लेकर वह धरना दे रहे हैं। उसे महिला आरक्षण बिल का अपोजिशन के सभी लीडर समर्थन कर रहे हैं। हम उल्टा मांग करते हैं कि भाजपा से लागू कर दें क्यों 34 पर टाल रही है। अभी 27 में लागू करें। चाहे 33% करे या फिर 40 करो या 50, लेकिन लागू तो करे। लेकिन यह लागू नहीं करेंगे। जो बिल 2023 में सर्वसम्मति से पास हो गया, आजाद भारत के इतिहास में पहली बार यह लोकतांत्रिक मजाक है कि किसी बिल को दोबारा लाया जा रहा है। वह बिल पहले ही पास है उसका शायद नोटिफिकेशन भी कर दिया गया है। यहां तो एसआईआर में राष्ट्रपति को भी कहना पड़ रहा है कि वह मुर्मू है। मेंबर पार्लियामेंट को बताना पड़ रहा है कि मैं हरिंदर मलिक हूं। क्या यह लोकतंत्र है। बिल सर्वसम्मति से 2030 में पास हो चुका है हम मांग करते हैं कि यह लागू हो। अफसोस मुझे जरूर है कि मैं जब गया कि हमारे यहां पंडित राज किशोर जी हमारे पारिवारिक सदस्य है। मैं उन्हें अनुरोध करके गया था कि आप मौत में न जाए हम जा रहे हैं वहां पर जो भी लोग आए आप उन्हें चाय पानी की व्यवस्था कर दीजिएगा। अगर वह ज्यादा रखेंगे तो खाने की व्यवस्था भी करा दीजिए। हापुड़ में हुई हिंसा को लेकर बोलते हुए कहां को महाराणा प्रताप देश के बहुत बड़े नेता है। वह हमारे देश की धरोहर है। इतिहास की शान है और देश की शान है अगर महाराणा प्रताप की जयंती पर भी लोग ऐसा करते हैं तो इस सरकार को मैं क्या करूं, ऐसी परिस्थिति पैदा क्यों हुई। जो हमारे देश के गौरव है। जिन्होंने देश के लिए सब कुछ बलिदान कर दिया। आप जाति धर्म राजनीति में बांटते हो और अगर कोई लोग महाराणा प्रताप को माल्यार्पण करना चाहते हैं, तो क्या गलत है। हमने भी उन्हें नमन किया है और आपने भी नमन क्या होगा। महाराणा प्रताप तो इस देश के गौरव है, यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।

 

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