सफल रहा भाकियू (तोमर) का ‘रणनीति फॉर्मूला’: रेल रोको आंदोलन के अल्टीमेटम पर झुका प्रशासन, 35 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा

सफल रहा भाकियू (तोमर) का ‘रणनीति फॉर्मूला’: रेल रोको आंदोलन के अल्टीमेटम पर झुका प्रशासन, 35 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा

मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन (तोमर) द्वारा किसानों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं को लेकर 16 जून को घोषित ‘रेल रोको आंदोलन’ का दबाव आखिरकार काम कर गया। संगठन की आक्रामक रणनीति और तैयारियों को भांपते हुए जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर भाकियू (तोमर) के पदाधिकारियों से लंबी वार्ता की।

अधिकारियों ने स्थानीय स्तर की मांगों को जल्द पूरा करने का वादा किया, जबकि राज्य और केंद्र सरकार से जुड़े मुद्दों के लिए मांग पत्र को उच्च स्तर पर भेजने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम 35 सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए आंदोलन को फिलहाल 4 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया है।

प्रचंड गर्मी और बिजली-पानी के संकट पर बरसे किसान

किसानों ने साफ कहा कि इस भयंकर गर्मी में सरकार न तो पर्याप्त बिजली दे पा रही है और न ही रजवाहों-नदियों में पानी छोड़ रही है। इस वजह से फसलें सूखने की कगार पर हैं। इसके बावजूद बिजली विभाग महज 5000 रुपये के बकाए पर गरीब किसानों के कनेक्शन काट रहा है, जबकि बड़े उद्योगपतियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

सौंपे गए मांग पत्र की 35 मुख्य मांगें:

प्रशासन के माध्यम से सरकार को भेजे गए मांग पत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगों को उठाया गया है:

  • गन्ना और एमएसपी भुगतान: गन्ने का भाव ₹500 प्रति क्विंटल किया जाए और बकाया भुगतान तुरंत हो। साथ ही MSP गारंटी कानून बने और ‘किसान आयोग’ का गठन हो।

  • बिजली व सिंचाई राहत: किसानों को घरेलू बिजली पर 50% छूट और खेती (जंगल) के लिए मुफ्त बिजली दी जाए। पंजाब-हरियाणा की तर्ज पर निर्बाध बिजली मिले। स्मार्ट मीटरों पर पूर्ण रोक लगे।

  • किसान सम्मान निधि व पेंशन: मोदी सरकार द्वारा दी जाने वाली किसान सम्मान निधि को ₹2000 से बढ़ाकर ₹6000 प्रति महीना किया जाए और 60 वर्ष से अधिक आयु के किसानों को ₹10,000 मासिक पेंशन मिले।

  • ट्रैक्टर और टैक्स से राहत: किसान के ट्रैक्टर से टोल टैक्स न वसूला जाए। खेती के उपकरणों और ट्रैक्टर से पूर्ण रूप से GST हटाई जाए और ट्रैक्टर की उम्र सीमा का नियम खत्म हो। ‘टोल नहीं तो रोड टैक्स नहीं’ का नियम लागू हो।

  • भ्रष्टाचार और अवैध खनन पर रोक: मुजफ्फरनगर जनपद को पूरी तरह भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाए ताकि मुख्यमंत्री के ‘जीरो टॉलरेंस’ का सपना सच हो। पुलिस द्वारा ‘बिजली चेकिंग’ के नाम पर किसानों से वसूले जा रहे 15-20 हजार रुपये के ‘सुविधा शुल्क’ पर रोक लगे।

  • प्रदूषण और स्वास्थ्य: भोपा रोड स्थित फैक्ट्रियों के प्रदूषण से ग्रामीण बीमार हो रहे हैं। फैक्ट्रियों की जांच कर उनकी चिमनियों को मानकों के अनुरूप किया जाए और पीड़ित किसानों का मुफ्त इलाज फैक्ट्री मालिकों द्वारा कराया जाए। जिला अस्पताल में फैले भ्रष्टाचार पर नकेल कसी जाए।

  • स्थानीय व अन्य मांगें:

    • रोहाना रेलवे स्टेशन पर कोरोना काल से बंद पड़ी पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव दोबारा शुरू हो।

    • खाद की कालाबाजारी पर रोक लगे।

    • किसान को एक जिले से दूसरे जिले में फसल बेचने पर परेशान न किया जाए।

    • श्रम विभाग में लंबित दो मृतक भट्ठा मजदूरों (पायल पत्नी दीपक कुमार और मुनसरीना पत्नी सईद) के परिवारों का मुआवजा तुरंत जारी किया जाए।

4 जुलाई को फिर हो सकता है बड़ा आंदोलन: चौधरी संजीव तोमर

“किसान देश का पेट पालता है, लेकिन उसे हर स्तर पर प्रताड़ित किया जा रहा है। अधिकारियों के मजबूत आश्वासन के बाद हमने 16 जून का चक्का जाम स्थगित किया है। लेकिन प्रशासन यह न भूले कि यह सिर्फ स्थगन है, अंत नहीं। अगर अगले 15 दिनों के भीतर (4 जुलाई तक) हमारी जायज मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो भारतीय किसान यूनियन (तोमर) एक बार फिर सड़कों और रेलवे ट्रैक पर उतरने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।”

भाकियू (तोमर) नेतृत्व

इस वार्ता के दौरान भारी संख्या में संगठन के पदाधिकारी, क्षेत्र के सम्मानित किसान और पुलिस-प्रशासनिक अमला मौजूद रहा। किसानों ने साफ कर दिया है कि वे अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।

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