मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति को पलीता लगा रहे है अधिकारी
जिलापंचायत मुजफ्फरनगर के अपर मुख्य अधिकारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

मुजफ्फरनगर : उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार के द्वारा सभी विभागों में जीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाते हुए कार्य करने की लगातार बात सामने आती रही है मगर कई विभाग में जीरो टॉलरेंस की नीति को अधिकारी पलीता लगाते नजर आ रहे हैं। इसी को लेकर जनपद मुजफ्फरनगर की जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी योगेश कुमार पर भ्रष्टाचार और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। जिला पंचायत सदस्य अमरकांत उर्फ चिकू ने मीडिया के सामने आरोप लगाया कि अधिकारी कार्यालय नहीं आते हैं और आवास से काम करते हैं। उन्होंने लकड़ी के टेंडर में कथित तौर पर कोड डालकर पारदर्शिता भंग करने का आरोप भी लगाया। जिला पंचायत सदस्य अमरकांत में जिला पंचायत के अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उनके खिलाफ सबूत का अंबार है मेरे पास जल्दी सार्वजनिक करूंगा इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी यदि जिला पंचायत अधिकारी योगेश कुमार रोजाना अपने ऑफिस पर नहीं आएंगे तो मैं जल्द ही इसके खिलाफ भी धरना प्रदर्शन कर अनशन करूंगा। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जिला पंचायत अधिकारी की संपत्ति की जांच कराने की मांग भी की, आरोप लगाया कि मौजूदा जिला पंचायत अधिकारी सबसे भ्रष्ट अधिकारी है और पूरे जिला पंचायत को बेचना चाहता है।
ज़िला पंचायत सदस्य अमरकांत मलिक उर्फ़ चिकू नें मीडिया कों जानकारी देते बताया देखिए मैं आपको बताऊं भाई साहब पिछली बार मान्य अध्यक्ष जी ने यह ठेका कराया था। बिल्कुल निष्पक्ष तरीके से हुआ था। इस बार अपर मुख्य अधिकारी योगेश कुमार महाभ्रष्ट अधिकारी हैं। अपने कार्यालय में बैठता नहीं है। आप कभी भी आकर देखिए। 10:00 बजे से 5:00 बजे तक यह अपने कार्यालय में नहीं मिलेगा। यह अपने आवास से कार्य करता है।, ऐ सी में बैठता है। कर्मचारियों को वहीं पर बुलाता है। छुट्टी की एप्लीकेशन देकर रखता है। अगर कोई सवाल जवाब होता है। तो कर्मचारी जो अक्षय बाबू कर्मचारी है। वह एप्लीकेशन वहां जाकर दे आते हैं। नहीं तो यह अपनी मनमर्जी से कुछ समय पहले अभी ढाई महीने पहले या अपनी गाड़ी जिला पंचायत से बाहर नहीं जा सकती। जिला से बाहर यह मेरठ टोल तक अपने जिला पंचायत की गाड़ी मांगता था। दूसरी बात रही टेंडर की टेंडर इसने लकड़ी के टेंडर में इसने अपना कोड डाला और एक मजे की बात आप इसे आकर के पूछना जिस अखबार में इसने विज्ञप्ति दी। वह कितने अखबार प्रिंट हुए। अगर आप वह 10 अखबार प्रिंट हुए लाकर दे दो। तो मैं मान जाऊं। क्योंकि यह मन भ्रष्ट है। इसने जिला पंचायत में भ्रष्टाचार मचा हुआ है। ऐसा अधिकारी जिला पंचायत में आज तक नहीं आया। इसका काम है। यहां से नोट भरकर के लेकर के जाना। और तमाम तरह के कमिश्नर ठेकेदारों से वसूलना और इधर-उधर से वसूलना इसने जमीन की प्लॉटिंग में जो प्लाटिंग होती है। उसमें इतना रुपए इकट्ठा इसने जिले से किया है। नोटिस दे करके अगर किसी कॉलोनी पर कोई कार्रवाई की हो नोटिस दिया है। इसने एक प्राइवेट अटैटेक रखा हुआ है। वह नोटों की वसूली कर कर देता है जिला पंचायत में प्राइवेट अल्ट्राटेक का क्या मतलब है किसी को अथॉरिटी देने का क्या मतलब है विभाग में मान्य मुख्यमंत्री जी से निवेदन करता हूं। आपके माध्यम से के इसकी संपत्ति की जांच कराई जाए। इसकी जांच कराई जाए। के इसके पास इतना धन कहां से आता है। और इस बार जो टेंडर हुआ। इसमें अपना कोड लगाया। और मीडिया के बावजूद और सीडीओ साहब के साथ मेरे संज्ञान में जो आया लेटर देने के बावजूद ना तो वह टेंडर निरस्त किया गया। क्यों नहीं किया गया। यह कहां है। अभी तक क्योंकि इसे पैसों का लालच है। यह चाहता है। यहां से पूरे मुजफ्फरनगर की जिला पंचायत को बेच करके गाजियाबाद अपने घर चला जाए। अपर मुख्य अधिकारी योगेश कुमार बाकी वह बताएंगे कि उनके साथ कौन सम्मिलित है। लकड़ी वाले का बिल्कुल सही आरोप है। जिस ठेकेदार का है। मैं कहता हूं। जिस ठेकेदार ने लगा रखा है। क्योंकि कोड डालने का क्या मतलब है। टेंडर ओपन है। वहां पर अपना कोड लगाने की क्या मतलब है। और उसके बाद इसने अपना एक स्टेटमेंट दिया। कि मेरी साइट में कोई साइट में खराबी नहीं है। यह सब मिली भगत अपर मुख्य अधिकारी योगेश कुमार की है। और अगर 23 तारीख से परमानेंट 10 से 5 ऑफिस में नहीं बैठेंगे तो मैं यहीं पर अनशन करूंगा अकेला बैठ करके और तब तक करूंगा। जब तक इन्हें जो सरकार जनता के पैसे से टैक्स लेकर के इन्हें दे रही है। अगर यह ऑफिस में नहीं बैठने का काम करेंगे तो मैं 23 तारीख से मैं यहां पहले अनशन करूंगा ,और फिर भूख हड़ताल करूंगा। और उसके बाद अगर मुझे जनता को का पैसा जो टैक्स का जा रहा है। और इन्हें तनख्वा मिल रही है। और यह अगर यहां पर ऑफिस में नहीं टाइम से बैठेंगे। जनता की पीड़ा नहीं सुनेंगे। तो मैं आत्मदाह करने का भी काम करूंगा। उसके बाद पहले करीब 75,80 लाख के करीब था। मुझे पहले की जानकारी नहीं इस बार तो इसकी मिली भगत है। मेरा कहना है। टेंडर ओपन कराया जाए पारदर्शिता टेंडर में तभी आएगी जब उसकी ओपन बोली होगी। और ओपन टेंडर कर दिया जाएगा। अगर यह गुप्त तरीके से करता है। तो उसकी कमी है। तो वह इसकी कमी है यह भ्रष्टाचारी कर रहा है या तो उसको ओपन कराए या प्रॉपर मीडिया के माध्यम से बिल्कुल प्रदर्शित के साथ टेंडर रखें।
मीडिया से बात कौन करेगा। जो साफ होगा, चोर आदमी क्यों बात करेगा। भाई मीडिया का सामना करने से कौन घबराएगी। जो भ्रष्टाचारियों होगा क्योंकि मीडिया एक ऐसा चैनल है। जो जनता को आदमी की असलियत दिखता है। और अभी दो-तीन दिन बाद कुछ कर्मचारियों की मैं और पोल खोलेगा। कि उनकी जांच भी है। किस तरीके से दबे हुए हैं। सबूत मेरे पास इतनी सबूत हैं। बस मैं ज्यादा नहीं कहना चाहता क्योंकि अगर इसी की जांच हो जाए तो सब चीज सामने आ जाएगी।