मुजफ्फरनगर में भारत-फिनलैंड की साझेदारी से बायो-सीएनजी कंपनी का शुभारंभ, जैविक कचरे से तैयार होगी स्वच्छ ऊर्जा

मुजफ्फरनगर में भारत-फिनलैंड की साझेदारी से बायो-सीएनजी कंपनी का शुभारंभ, जैविक कचरे से तैयार होगी स्वच्छ ऊर्जा

मुजफ्फरनगर में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई संभावनाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज बुधवार को मुजफ्फरनगर में भारत और फिनलैंड की साझेदारी से आर्किप्लग उज्जाला बायो एनर्जी सॉल्यूशंस कंपनी का शुभारंभ किया गया। दोपहर तीन बजे प्लासा होटल एंड रिसॉर्ट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कंपनी की आधुनिक तकनीक और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी गई। कंपनी का मुख्य उद्देश्य जैविक कचरे और अन्य जैविक सामग्रियों से बायो-सीएनजी उत्पादन की परियोजनाओं को विकसित करना है।

भारत की उज्जाला बायो एनर्जी सॉल्यूशंस और फिनलैंड की आर्किप्लग के संयुक्त प्रयास से शुरू हुई इस कंपनी में एडवांस ड्राई और मल्टी फीड तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक की खासियत कम पानी की खपत के साथ विभिन्न प्रकार के जैविक कच्चे माल से गैस उत्पादन की क्षमता है।

कार्यक्रम में किरीट प्रजापति ने कहा कि आधुनिक जैव-ऊर्जा तकनीक भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। वहीं डॉ. आलोक अग्रवाल ने बताया कि देश में बायो-सीएनजी परियोजनाओं के विस्तार के लिए उन्नत मल्टी फीड तकनीक बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ फिनलैंड की कंपनी के सहयोग से नई पहल की गई है।

नीरज कुमार सिंह ने बताया कि एडवांस ड्राई तकनीक से पानी की खपत कम होगी, जबकि मल्टी फीड तकनीक के जरिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अलग-अलग जैविक सामग्रियों का उपयोग किया जा सकेगा। इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों में बायो-सीएनजी परियोजनाएं स्थापित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

फिनलैंड की आर्किप्लग कंपनी से जुड़े मिका ने बताया कि दोनों संस्थाएं लंबे समय से इस तकनीक पर काम कर रही हैं और अब भारत में इसके विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। कंपनी के निदेशकों ने हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई।

कार्यक्रम के आयोजन में उज्जाला की मीडिया प्रमुख लवी अग्रवाल का विशेष सहयोग रहा। इस दौरान शहर के कई प्रमुख उद्योगपति और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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