अमेरिका में कुछ वामपंथी अकादमिक समूहों, कुछ शिक्षाविदों और कुछ इस्लामी लॉबिंग संगठनों द्वारा भारत और उसकी परंपराओं को नकारात्मक और विकृत रूप में प्रस्तुत किया जा हैं – अशोक बालियान

अमेरिका में कुछ वामपंथी अकादमिक समूहों, कुछ शिक्षाविदों और कुछ इस्लामी लॉबिंग संगठनों द्वारा भारत और उसकी परंपराओं को नकारात्मक और विकृत रूप में प्रस्तुत किया जा हैं – अशोक बालियान, चेयरमैन,पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन
डलास (अमेरिका)
हमें अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिका में पिछले चालीस वर्षों से रह रहे अप्रवासी भारतीय अजय अग्रवाल और उनकी पत्नी आशा अग्रवाल से मिलने का अवसर मिला। वे टेक्सास के डलास में रहते हैं। उन्होंने हमें बताया कि अमेरिका में कुछ वामपंथी अकादमिक समूहों, कुछ शिक्षाविदों, कुछ इस्लामी लॉबिंग संगठनों जैसे कि Indian American Muslim Council (IAMC) तथा कुछ सिख अलगाववादी संगठनों द्वारा एक संगठित प्रयास किया जा रहा है, जिससे हिंदू धर्म, भारत और उसकी परंपराओं को नकारात्मक और विकृत रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
इनका उद्देश्य भारत की एकता, संस्कृति और धार्मिक पहचान को कमजोर करना है। जहां एक ओर वामपंथी विचारधारा से प्रेरित शिक्षाविद हिंदू धर्म को जातिवादी, ब्राह्मणवादी और दलित-विरोधी ठहराने का प्रयास करते हैं, वहीं कुछ इस्लामी संगठन भारत को इस्लाम-विरोधी और अल्पसंख्यक विरोधी बताकर प्रचार करते हैं, खासकर कश्मीर, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और NRC जैसे मुद्दों के संदर्भ में।
इसी तरह, कुछ अलगाववादी सिख समूह, जो खालिस्तान आंदोलन का समर्थन करते हैं और विदेशों में भारत विरोधी दुष्प्रचार और हिन्दू-विरोधी एजेंडा को बढ़ावा देते हैं। ये संगठन भारत सरकार, विशेषकर भाजपा शासन की नीतियों को अल्पसंख्यकों के विरुद्ध और हिंदू वर्चस्ववाद (Hindu Supremacy) से प्रेरित बताकर पेश करते हैं।
अमेरिका में गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा संचालित संगठन ‘Sikhs for Justice’ (SFJ) अवैध रूप से अमेरिका पहुंचने वाले कुछ सिख युवाओं के मामलों को उठाकर यह दावा करता है कि वे भारत में ‘खालिस्तान’ की मांग के कारण उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। इस कथित उत्पीड़न को आधार बनाकर इन युवाओं को अमेरिका में शरण (Asylum) दिलाने का प्रयास किया जाता है। यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को भी प्रभावित करने का प्रयास है। अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में कुछ छोटे समूह हैं जो खालिस्तान की बात करते हैं, लेकिन ये लोग बहुत ही छोटी संख्या में हैं और आम सिख समाज उनसे सहमत नहीं हैं।
इन विचारधारात्मक हमलों और दुष्प्रचार अभियानों का प्रतिकार केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि तथ्यों, शोध और सूझबूझपूर्ण संवाद से ही किया जा सकता है। अमेरिका में कुछ हिंदू संगठन इस दिशा में प्रयासरत हैं, जैसे:‘Hindu American Foundation (HAF)’ जो अमेरिका में हिंदू धर्म की सकारात्मक छवि को बढ़ावा देता है। इसी तरह ‘Coalition of Hindus of North America (CoHNA)’ हिंदू विरोधी अभियान और नीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाता है। ‘Infinity Foundation’ (राजीव मल्होत्रा द्वारा स्थापित) बौद्धिक और अकादमिक स्तर पर हिंदू फोबिया का खंडन करता है। ‘Vishwa Hindu Parishad of America (VHPA)’ प्रवासी भारतीयों में वैदिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार करता है।
इसी संदर्भ में अमेरिका में भाजपा समर्थक व प्रवासी भारतीयों के लिए सक्रिय कुछ संगठन भी मौजूद हैं, जो भारत और भारतीय नीतियों का समर्थन करती हैं। इनमें ओवरसीज़ फ्रेंड्स ऑफ BJP या भारतीय-निवासी समर्थक नेटवर्क (Overseas BJP / OFBJP जैसे अप्रौपचारिक समूहों) और अन्य प्रादेशिक/स्थानीय समर्पित समूह शामिल होते हैं। अजय अग्रवाल ने हमें बताया कि अमेरिका में अब भारतीय समुदाय भी संगठित होकर, तथ्यों और तर्कों के साथ इस झूठे विमर्श का विरोध कर रहा है।
इन संगठनों का उद्देश्य केवल हिंदू धर्म की रक्षा करना नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को उचित सम्मान दिलाना भी है।

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