मुजफ्फरनगर में थाना साइबर क्राइम ने अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का किया भंडाफोड़, राजस्व को चपत लगाने वाले 2 शातिर गिरफ्तार

मुजफ्फरनगर : उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर की साइबर क्राइम पुलिस टीम को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने थाना खतौली कोतवाली क्षेत्र के गांव शेखपुरा में अवैध रूप से संचालित किए जा रहे सिम बॉक्स आधारित टेलीफोन एक्सचेंज का पर्दाफाश करते हुए दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह अंतरराष्ट्रीय VOIP कॉल्स को सामान्य वॉइस कॉल में बदलकर न केवल भारत सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व की हानि पहुँचा रहा था, बल्कि देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरा बना हुआ था।
दरअसल जनपद मुजफ्फरनगर में एसपी क्राइम हिंदू सिद्धार्थ ने प्रेस वार्ता करते हुए बताया थाना साइबर क्राइम पुलिस को भारत सरकार के संचार मंत्रालय से मिली गोपनीय सूचना के आधार पर साइबर क्राइम टीम ने तकनीकी विशेषज्ञता का प्रयोग करते हुए इस नेटवर्क को ट्रैक किया। पुलिस ने वसीम (निवासी शेखपुरा) और वकील (निवासी मवाना, मेरठ) को उस समय दबोचा, जब वे पकड़े जाने के डर से अपना सेटअप कहीं और शिफ्ट करने की फिराक में थे।
पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने भारी मात्रा में अवैध संचार प्रणाली में प्रयुक्त होने वाला सामान बरामद किया है। जिसमें 36 सिम कार्ड एवं 10 मोबाइल फोन
02 नोकिया रिमोट रेडियो यूनिट (RRU)
02 लैपटॉप और 02 एटीएम कार्ड
01 डिस कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।
पूछताछ में हुए चौंकाने वाले खुलासे
मुख्य आरोपी वसीम ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह अपने साले वासित और अन्य साथियों के साथ मिलकर यह गोरखधंधा कर रहा था। आरोपी फर्जी सिम कार्ड का उपयोग कर सिम बॉक्स चलाते थे, जिससे उन्हें घर बैठे मोटी कमाई होती थी। जांच में वसीम के मोबाइल से फर्जी GST बिल भी बरामद हुए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि यह गिरोह वित्तीय धोखाधड़ी में भी लिप्त था।
थाना साइबर क्राइम में अभियुक्तों के विरुद्ध बीएनएस (BNS) की विभिन्न धाराओं, आईटी एक्ट और इंडियन टेलीकॉम एक्ट 2023 के तहत गंभीर मामला पंजीकृत किया गया है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों—वासित, फिरोज और कमरूद्दीन की तलाश में जुटी है।