शामली में आयुष मालिक के धर्मांतरण मामले में कूदी जाट महासभा मुजफ्फरनगर
जाट महासभा मुजफ्फरनगरके अध्यक्ष धर्मवीर बालियान ने मामले को लेकर दिया बड़ा बयान
उत्तर प्रदेश के जनपद शामली में हिंदू युवक आयुष मालिक द्वारा मुस्लिम समाज की युवती चांदनी के प्यार में इस्लाम धर्म अपनाने के खुलशे के बाद देश में यह एक बड़ा बहस का मुद्दा छिड़ गया है जहां पिछले 10 दिनों से इस मामले में बवाल मचा हुआ है वही आयुष मालिक को इस्लाम धर्म कबूल करने पर कोई पछतावा नहीं है और वह सनातन धर्म में वापसी आने के लिए भी तैयार नहीं हो रहा जिसको लेकर जनपद मुजफ्फरनगर की जाट महासभा के अध्यक्ष धर्मवीर बालियान ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि हमारी भी जानकारी में सोशल मीडिया के माध्यम से आया था और मैं स्वयं उनके पिताजी से बात की मलिक साहब से और लगभग आधा घंटा मेरी बात हुई कि हमने पूछा कि कैसे हुआ इतने दिन अगर आपने बात छुपा कर रखी है ऐसा क्या कारण था समाज को पहले बताना थे कि जिस समय ऐसी घटना यह करनी चाह रहा था उसे समय अगर आप बताते हैं तो कहीं ना कहीं समाज भी आगे आकर मदद करता लेकिन मैं यह कह रहा हूं कि अब भी उन्हें बड़ा दिल दिखाना पड़ेगा कहीं ना कहीं देवराज पुत्र मोह के चक्कर में है उनकी जो बातों से आभास हो रहा है आज भी वह पुत्र मोह में है नहीं तो कड़ाई से फैसला ले समाज से बड़ा कोई नहीं होता समाज तो अच्छे से अच्छे को ठीक कर देता है यह तो आयुष मालिक ही है। मैं इसमें यह कहूंगा कि कहीं ना कहीं जैसे कि आज भी मैं सोशल मीडिया पर देख रहा था एक भाई लिख रहा था सोशल मीडिया पर बयान में यह कहा है कि कभी आयुष मालिक मंदिर भी नहीं गया इसलिए। उन्होंने कहा कि हमारे बड़े तो कभी भी मंदिर नहीं जाते थे सभी आर्य समाज से जुड़े हुए थे और अपना जो भी कुछ था उसे गुरु मां को स्वामी दयानंद जी को समाज ने स्वीकार किया और उनके बताए थे रास्तों पर चलता था उसका यह फायदा हमने देखा कि संस्कारों की कमी नहीं रहती जो व्यक्ति आर्य समाज से जुड़ गया परिवार में अगर आज भी आर्य समाज परिवार को देखोगे तो उसमें और उसकी कई पीढ़ी का इतिहास उठाकर देखा आज तक ऐसी कोई घटना देखने को नहीं मिलेगी तो मैं भी इस पक्ष में नहीं हूं कि मंदिर में जाकर सारी चीज अच्छी ही मिल रही है ठीक है हमारी आस्था का केंद्र है हम यह नहीं कहते कि जो मंदिर को मान रहा है वह ना माने उनकी आस्था है वह माने लेकिन ऐसे सार्वजनिक ज्ञान जो दिया है वह भी मैं ठीक नहीं मानता इसमें मैं तो अभी यही कहूंगा वह समाज के बीच में जाकर समाज से मदद मांगे मैं निश्चित रूप से एक कह सकता हूं कि आयुष समाज की बात नहीं टालेगा अगर डालेगा तो फिर उसका इलाज समाज करेगा और *दूसरा इलाज लठ भी है* अच्छा-अच्छा का इलाज हो जाता है अपनी इच्छा ठीक है हर व्यक्ति की अपनी इच्छा होती है आजादी है उसकी इच्छा है लेकिन यह नहीं है कि पूरे काम को पूरे समाज को डुबोकर ऐसा काम करेगा।
उन्होंने कहा कि चलो आयुष के माता-पिता की तो यह बात रही की 30 साल उनके साथ रहा वह समय नहीं दे पाए लेकिन दो-चार साल में यह पता नहीं कहां से ले आया शिक्षा मैं तो दोनों धर्म के लोगों को कहना चाहता हूं कि शांतिपूर्वक रहे यह तो माहौल न बिगाड़े रोज मैं देख रहा हूं कितने ही संगठन तो माहौल बिगड़ने का प्रयास कर रहे हैं और 2013 का दंगा इस जिले में हो चुका है वह सब ने देखा है ऐसा कोई ना करें रही बात यह की एक जाति को लेकर बहुत टिप्पणी की जा रही है। मैं जब तो और लोगों ने भी बदले होंगे लेकिन जिस तरह से आयुष मालिक के मामले में एक जाट शब्द का प्रयोग किया जा रहा है जो भी लिख रहा है वह जाट लिख रहा है कि सारा अत्याचार इसी व्यक्ति ने कर मेरा यह कहना है कि एक तो बिरादरी पर टिप्पणी कोई ना करें ठीक है वह हिंदू समाज में जन्म लिया है तो कम से कम यह तो रहे कि वह हिंदू लिख ले अगर जाट ही लिखना है तो फिर फिर हमें हिंदू न माने जब हमें जात से ही जाना जा रहा है तो फिर हमें हिंदू में ना जोड़ा जाए नहीं तो हिंदू पूरा समाज है जो घटना हुई है यह गलत है ऐसा नहीं होना चाहिए था असर उसे परिवार पर नहीं पूरे समाज पर पड़ रहा है और माहौल भी खराब होता है।
जो हम वीडियो देख रहे थे उससे तो लगता है कि यह जो हमारे मुल्ला मौलवी है उनसे भी कट्टर बन चुका है ऐसा लग रहा है की अब्दुल बुखारी के जगह जमा मस्जिद पर इसे ही बैठना हो भाषण तो ऐसा ही दे रहा है। कह रहा है कि मैं तो अपने दिन को मान लिया अरे सबसे बड़ा दिन तो माता-पिता है दुनिया में जिन्होंने आपको जन्म दिया जिन्होंने आपको पाल-पोसकर बड़ा किया जिन्होंने खाना सिखाया जिन्होंने बैठना सिखाए वे भगवान भी वे ही हैं और दीन भी वही है। माता पिता से बड़ा तो मैं किसी को मानता नहीं फिर भी गलती हुई है बाल बच्चा है उसे सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए वह सामाजिक रूप से हो अन्यथा फिर कानून रूप से है और तीसरा फिर एक समाज की परंपरा रही है ऐसे मामले पहले ना कोर्ट में जाते थे ना कहीं और जरूरत पड़ती थी दामडस ( रस्सी) रहती थी घर में और साँटे रहते थे लटका कर पेड़ पर 10 मिनट में ठीक करते थे वह तो नाम भी नहीं लगा उसे कहेंगे चल पड़े को वह भागेगा उल्टा।
ब्रायन वास के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह तो वही बता सकता है हमारा ब्रेनवाश क्यों नहीं कर देता कोई मैं इस चीज को नहीं मानता । मैं कहता हूं कि यह तो ऐसी धरती है मुजफ्फरनगर की जरा सी देर में कुछ भी हो जाता है 2013 में दंगा हुआ था मैं तो दोनों समाज के लोगों को कहना चाहता हूं कि इस मामले में बल बैठकर मामले को निपट ले